विमानन ईंधन कीमतों को स्थिर रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर

विमानन ईंधन कीमतों को स्थिर रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर

केंद्र सरकार ने 3 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अनुसूचित भारतीय एयरलाइनों के लिए विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों को स्थिर रखने हेतु ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अधिकतम 10,000 करोड़ रुपये की एकमुश्त बजटीय सहायता प्रदान करने को मंजूरी दी है। यह सहायता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के माध्यम से ब्याज-मुक्त अग्रिम राशि के रूप में दी जाएगी और इसका उद्देश्य घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन पर बढ़ती ईंधन लागत के प्रभाव को कम करना है।

एटीएफ क्या है और इसका महत्व

एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) वह विशेष ईंधन है जिसका उपयोग टरबाइन संचालित विमानों में किया जाता है। एयरलाइनों के परिचालन खर्च में ईंधन की लागत सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक होती है। भारत में एटीएफ की कीमतें एयरलाइन उद्योग की लाभप्रदता और टिकट दरों को सीधे प्रभावित करती हैं। नई व्यवस्था के तहत घरेलू एयरलाइन परिचालन के लिए एटीएफ की कीमत 75.6 रुपये प्रति लीटर तक सीमित रखी गई है, जिससे एयरलाइनों को लागत नियंत्रण में सहायता मिलेगी।

पश्चिम एशिया संकट और मूल्य अस्थिरता

सरकार का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतों में आई भारी अस्थिरता के बाद लिया गया है। पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के कारण मार्च 2026 में एटीएफ की कीमत लगभग 60.5 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। यह वृद्धि लगभग ढाई गुना रही, जिसने विमानन क्षेत्र पर वित्तीय दबाव बढ़ा दिया। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने एक स्थिर मूल्य तंत्र विकसित किया है, जिससे एयरलाइनों को अगले 36 महीनों तक ईंधन कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से राहत मिल सकेगी।

स्व-निर्भर रिवॉल्विंग फंड की व्यवस्था

स्वीकृत सहायता राशि को एक स्व-निर्भर रिवॉल्विंग फंड के रूप में संचालित किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य ईंधन मूल्य स्थिरता को दीर्घकालिक आधार पर बनाए रखना है। फंड के माध्यम से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे निर्धारित मूल्य पर एटीएफ की आपूर्ति जारी रख सकें। यह प्रणाली विमानन क्षेत्र में परिचालन स्थिरता बनाए रखने और यात्रियों के लिए संभावित किराया वृद्धि को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकती है।

निगरानी और कार्यान्वयन व्यवस्था

इस फंड के संचालन और निगरानी के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग समिति का गठन किया जाएगा। समिति में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा व्यय विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति फंड के उपयोग, मूल्य स्थिरता तंत्र और वित्तीय प्रबंधन की नियमित समीक्षा करेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) विमानन उद्योग की प्रमुख परिचालन लागतों में से एक है।
  • भारत में एटीएफ की कीमतें पेट्रोल और डीजल से अलग निर्धारित की जाती हैं।
  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय देश की पेट्रोलियम नीति और ईंधन संबंधी प्रशासनिक मामलों का संचालन करता है।
  • अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस निर्धारित उड़ान कार्यक्रम के अनुसार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्री सेवाएं संचालित करती हैं।
  • भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन विनियमित किया जाता है।

एटीएफ मूल्य स्थिरता के लिए घोषित यह 10,000 करोड़ रुपये का सहायता पैकेज भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे एयरलाइनों को बढ़ती ईंधन लागत के प्रभाव से बचाने, संचालन को सुचारु बनाए रखने और यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलने की संभावना है। आने वाले वर्षों में यह पहल विमानन उद्योग की वित्तीय स्थिरता और विकास को भी मजबूती प्रदान कर सकती है।

Originally written on June 4, 2026 and last modified on June 4, 2026.

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