विज़न 2031 के जरिए महिलाओं के लिए सबसे अनुकूल राज्य बनने की दिशा में केरल का कदम
केरल सरकार द्वारा प्रस्तावित विज़न 2031 एक व्यापक नीतिगत रोडमैप है, जिसका उद्देश्य राज्य को भारत का सबसे महिला-अनुकूल राज्य बनाना है। इस दस्तावेज़ में महिलाओं की सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन, घरेलू हिंसा की रोकथाम, पर्यटन, लैंगिक बजट और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न उपाय शामिल किए गए हैं। यह पहल महिलाओं के लिए सुरक्षित, समावेशी और अवसरों से भरपूर वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनी उपाय
विज़न 2031 के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए आंध्र प्रदेश के दिशा अधिनियम की तर्ज पर नया कानून लाने का प्रस्ताव किया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार महिलाओं के विरुद्ध कुछ निर्दिष्ट अपराधों के मामलों में 21 दिनों के भीतर सुनवाई और निर्णय सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त राज्य में अधिक महिला पुलिस थानों की स्थापना तथा महिला पुलिस अधिकारियों की संख्या बढ़ाने की भी योजना है। महिला पुलिस कर्मियों को स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के रूप में नियुक्त करने पर भी विशेष जोर दिया गया है, ताकि महिलाओं से जुड़े मामलों का संवेदनशील और प्रभावी तरीके से निपटारा हो सके।
सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा और सुविधा
महिलाओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विज़न 2031 में कई नई पहलें प्रस्तावित की गई हैं। इनमें एक ‘डिस्ट्रेस अलर्ट ऐप’ शामिल है, जिसके माध्यम से महिलाएं आपातकालीन स्थिति में सीधे नियंत्रण कक्ष को सूचना भेज सकेंगी। इसके अलावा रात के समय सुरक्षित यात्रा के लिए प्रमुख मार्गों पर महिलाओं के लिए विशेष ‘पिंक बस’ सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई गई है। राज्य सरकार ने ‘प्रियदर्शिनी योजना’ के तहत 15 जून 2026 से महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की साधारण बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की भी घोषणा की है।
घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न की रोकथाम
विज़न 2031 के अंतर्गत ‘अवलकोप्पम’ नामक पहल प्रस्तावित की गई है, जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है। यह कार्यक्रम जागरूकता, सहायता सेवाओं और संस्थागत सहयोग के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर केंद्रित होगा। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को कानूनी और सामाजिक सहायता तक आसान पहुंच प्रदान करना है।
महिला-अनुकूल पर्यटन और सार्वजनिक सुविधाएं
केरल सरकार महिलाओं के लिए पर्यटन को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। योजना के तहत प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों पर महिला यात्रियों के लिए विश्राम गृह, भोजनालय और छात्रावास जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। वर्ष 2022 में शुरू की गई केरल की लैंगिक समावेशी पर्यटन नीति के तहत 17,600 से अधिक महिलाओं को महिला-नेतृत्व वाले पर्यटन इकाइयों, होमस्टे और स्मारिका दुकानों से जोड़ा जा चुका है। इससे महिला उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है।
लैंगिक बजट और विकास योजना
महिलाओं के विकास और सशक्तिकरण कार्यक्रमों को वित्तीय समर्थन देने के लिए केरल ने वर्ष 2026-27 के लिए 5,586.99 करोड़ रुपये का लैंगिक बजट निर्धारित किया है। यह राशि राज्य की कुल 25,401 करोड़ रुपये की योजना व्यय का हिस्सा है। लैंगिक बजट का उद्देश्य महिलाओं और अन्य वंचित समूहों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराना है।
विकास और लोकतंत्र पर फोकस
राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को व्यापक सामाजिक विकास और लोकतांत्रिक भागीदारी से जोड़कर देख रही है। इसी दिशा में केरल राज्य योजना बोर्ड ने फरवरी 2026 में विकास और लोकतंत्र विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया था। ऐसे प्रयास महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करने में सहायक माने जा रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विज़न 2031 का उद्देश्य केरल को भारत का सबसे महिला-अनुकूल राज्य बनाना है।
- दिशा अधिनियम आंध्र प्रदेश से संबंधित है और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के त्वरित निपटारे से जुड़ा है।
- प्रियदर्शिनी योजना के तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को केएसआरटीसी की साधारण बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा मिलेगी।
- केरल की लैंगिक समावेशी पर्यटन नीति वर्ष 2022 में शुरू की गई थी।
- इस नीति के तहत 17,600 से अधिक महिलाओं को पर्यटन आधारित गतिविधियों से जोड़ा गया है।
- केरल का 2026-27 का लैंगिक बजट 5,586.99 करोड़ रुपये है।
विज़न 2031 महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाला एक व्यापक रोडमैप है। यदि प्रस्तावित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो केरल महिला कल्याण और लैंगिक समानता के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर सकता है।