विजयपुरा में किशमिश प्रसंस्करण इकाई से कर्नाटक के अंगूर किसानों को राहत
कर्नाटक ने विजयपुरा जिले के थोरवी गांव में किशमिश प्रसंस्करण और कोल्ड स्टोरेज इकाई शुरू की है। यह सुविधा कर्नाटक ग्रेप एंड वाइन बोर्ड के तहत स्थापित की गई है और इसका उद्देश्य राज्य के अंगूर उत्पादकों को कटाई के बाद बेहतर प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
किसानों के लिए नई प्रसंस्करण सुविधा
यह इकाई विशेष रूप से अंगूर से बनने वाली किशमिश के लिए तैयार की गई है, लेकिन इसमें दालें, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों के भंडारण की भी क्षमता है। कुल मिलाकर इसकी क्षमता 10,000 टन है। इकाई प्रति घंटे चार टन किशमिश का प्रसंस्करण कर सकती है। प्रसंस्करण के बाद किशमिश को 15 किलोग्राम के बैग में पैक किया जाता है और फिर कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है।
इस सुविधा में वेट और ड्राई प्रोसेसिंग लाइन, कलर सॉर्टिंग और स्वचालित पैकिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इससे गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने और बाजार में एकसमान उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा और वित्तपोषण की व्यवस्था
इस परियोजना को नाबार्ड और राज्य सरकार ने ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के तहत वित्तपोषित किया है। इकाई को आंशिक रूप से सौर ऊर्जा से चलाने की व्यवस्था की गई है, जिसकी वर्तमान क्षमता 250 किलोवाट है। इसे आगे बढ़ाकर 500 किलोवाट तक करने की योजना है।
सौर ऊर्जा आधारित संचालन से बिजली लागत कम होने और प्रसंस्करण इकाई की दीर्घकालिक कार्यक्षमता बेहतर होने की उम्मीद है। ग्रामीण औद्योगिक ढांचे में यह मॉडल कृषि-आधारित इकाइयों के लिए उपयोगी माना जा सकता है।
क्षेत्रीय अंगूर उत्पादन को मिलेगा सहारा
यह इकाई नवंबर 2026 से पूरी तरह कार्यशील होने की उम्मीद है। इससे विजयपुरा, बागलकोट और बेलगावी जिलों के अंगूर किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इन तीन जिलों में कर्नाटक के 47,177 हेक्टेयर अंगूर क्षेत्र में से 42,000 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है।
कर्नाटक में हर साल लगभग 1.5 लाख से 2 लाख टन किशमिश का उत्पादन होता है। नई सुविधा से किसानों को प्रसंस्करण और भंडारण के लिए महाराष्ट्र के सांगली या पुणे भेजने की जरूरत कम होगी। इससे समय, परिवहन लागत और निर्भरता तीनों में कमी आने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नाबार्ड की स्थापना 1982 में कृषि और ग्रामीण ऋण के लिए एक विकास बैंक के रूप में की गई थी।
- ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि की शुरुआत 1995-96 में ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने के लिए हुई थी।
- कर्नाटक भारत के प्रमुख अंगूर उत्पादक राज्यों में शामिल है, और विजयपुरा इसका एक प्रमुख उत्पादन क्षेत्र है।
- कलर सॉर्टिंग और ऑटोमेटेड पैकिंग जैसी तकनीकें कृषि प्रसंस्करण इकाइयों में गुणवत्ता और मानकीकरण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
यह परियोजना कर्नाटक में कृषि मूल्य संवर्धन और पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय किसानों को प्रसंस्करण के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।