भारत-मेर्कोसुर व्यापार समझौते के विस्तार से बढ़ेंगे निर्यात अवसर
भारत और दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मेर्कोसुर ने 14 सितंबर 2026 को अपने मौजूदा तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार के लिए बातचीत शुरू करने की योजना की घोषणा की। यह कदम दोनों पक्षों के बीच व्यापार को केवल रियायती शुल्क तक सीमित रखने के बजाय एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में ले जाने का संकेत देता है।
भारत-मेर्कोसुर व्यापार संबंधों का नया चरण
भारत-मेर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता जून 2009 से लागू है। इसके तहत भारत को 450 उत्पाद श्रेणियों पर शुल्क रियायतें मिलती हैं, जबकि मेर्कोसुर को 452 उत्पाद श्रेणियों पर रियायतें दी गई हैं। 2025 में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 21 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि कुछ अनुमानों में 2025-26 के लिए यह आंकड़ा 21.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक बताया गया है।
अब दोनों पक्ष विस्तारित वार्ताओं के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस तैयार कर रहे हैं। यह दस्तावेज़ भविष्य की बातचीत का दायरा, ढांचा और प्राथमिकताएँ तय करेगा। व्यापार समझौतों में ऐसी रूपरेखा इसलिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि किन क्षेत्रों में रियायतें, नियम और प्रक्रियाएँ तय की जाएंगी।
तरजीही समझौते से एफटीए की ओर बढ़ता रास्ता
तरजीही व्यापार समझौता और मुक्त व्यापार समझौता, दोनों में अंतर होता है। पीटीए में चुनिंदा वस्तुओं पर शुल्क में छूट दी जाती है, जबकि एफटीए आम तौर पर अधिक व्यापक होता है और इसमें वस्तुओं के साथ सेवाएँ, निवेश और व्यापार सुगमता जैसे विषय भी शामिल हो सकते हैं। इसी वजह से भारत और मेर्कोसुर के बीच प्रस्तावित विस्तार को भविष्य में अधिक गहरे आर्थिक सहयोग की तैयारी माना जा रहा है।
मेर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का एक क्षेत्रीय आर्थिक समूह है, जो सीमा शुल्क संघ और साझा बाजार की दिशा में काम करता है। इसके सदस्य देश समन्वित व्यापार नीति और बाहरी व्यापार वार्ताओं के लिए इस मंच का उपयोग करते हैं। भारत के लिए यह समूह लैटिन अमेरिकी बाजारों तक पहुँच बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
पेपरलेस व्यापार और सीमा शुल्क आधुनिकीकरण
14 सितंबर 2026 को ही भारत और मेर्कोसुर ने पीटीए का पहला अतिरिक्त प्रोटोकॉल भी अपनाया। इस प्रोटोकॉल के तहत पेपरलेस व्यापार को बढ़ावा दिया गया है और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन को मान्यता दी गई है। यह व्यवस्था व्यापार दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन को आसान बनाती है और प्रक्रिया को तेज करती है।
यह प्रोटोकॉल 9 अप्रैल 2026 को संयुक्त प्रशासनिक समिति की पाँचवीं बैठक में आपसी सहमति से अपनाया गया था। इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं के मूल देश की पुष्टि करते हैं और शुल्क रियायतों का लाभ लेने में मदद करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मेर्कोसुर का पूरा नाम Southern Common Market है, जिसे दक्षिण अमेरिकी क्षेत्रीय समूह के रूप में जाना जाता है।
- भारत-मेर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता जून 2009 से लागू है।
- पीटीए में चुनिंदा वस्तुओं पर शुल्क रियायतें दी जाती हैं, जबकि एफटीए का दायरा इससे व्यापक होता है।
- मेर्कोसुर के सदस्य देश हैं: ब्राजील, अर्जेंटीना, बोलीविया, उरुग्वे और पराग्वे।
इस विस्तार वार्ता से भारत और दक्षिण अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना है। साथ ही, डिजिटल कस्टम प्रक्रियाओं और शुल्क रियायतों के जरिए दोनों पक्षों के कारोबारियों के लिए अवसर और सुगमता बढ़ सकती है।