विकसित भारत 2047 के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन
भारत में स्वच्छ, टिकाऊ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में “इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: बिल्डिंग इंडिया एन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब फॉर विकसित भारत” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघों में से एक प्रमुख संस्था एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) द्वारा किया गया। सम्मेलन में भारत को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और हरित परिवहन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा हुई।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का महत्व
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का अर्थ है परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जिंग नेटवर्क और उनसे संबंधित ऊर्जा अवसंरचना का उपयोग। भारत में यह क्षेत्र बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन, चार्जिंग स्टेशन, बैटरी आपूर्ति श्रृंखला तथा इलेक्ट्रिक वाहन के विभिन्न पुर्जों के घरेलू निर्माण को शामिल करता है। बढ़ते प्रदूषण, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भविष्य की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
नीति, उद्योग और विनिर्माण पर चर्चा
सम्मेलन में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के विकास के लिए नीति की निरंतरता, चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार, विनिर्माण का स्थानीयकरण, मजबूत बैटरी आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय सहायता और तकनीकी नवाचार जैसे प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इन पहलों का उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण को गति देना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। भारत का ईवी विनिर्माण तंत्र मूल उपकरण निर्माता (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स), ऑटोमोबाइल पुर्जा निर्माता तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित है। स्थानीय स्तर पर पुर्जों के उत्पादन को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योग को मजबूती मिलेगी।
एसोचैम की भूमिका और विकसित भारत का दृष्टिकोण
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने बताया कि एसोचैम 2.0 पहल के अंतर्गत संस्था 20 क्षेत्र-विशिष्ट परिषदों के माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिलकर कार्य करेगी। एसोचैम भारत के सबसे पुराने उद्योग संगठनों में से एक है, जो विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है। सम्मेलन में विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को भी प्रमुखता दी गई। यह राष्ट्रीय दृष्टि वर्ष 2047 तक, जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से जुड़ी हुई है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण साधन माना गया।
हरित विकास और सतत परिवहन
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में हरित विकास, मजबूत अवसंरचना, पारदर्शी शासन व्यवस्था और परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) की आवश्यकता पर बल दिया। परिपत्र अर्थव्यवस्था का उद्देश्य संसाधनों का पुनः उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण और अधिकतम दक्षता सुनिश्चित करना है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को इन सिद्धांतों के अनुरूप विकसित करने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में वाहन असेंबली, बैटरी उत्पादन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तथा चार्जिंग उपकरणों का निर्माण शामिल है। विनिर्माण का स्थानीयकरण भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ रोजगार सृजन और तकनीकी विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- दिल्ली ईवी नीति 2.0 को भारत के अन्य राज्यों के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
- विकसित भारत 2047 भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने की राष्ट्रीय परिकल्पना है।
- परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) संसाधनों के पुनः उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण और संसाधन दक्षता पर आधारित आर्थिक मॉडल है।
- एमएसएमई का अर्थ है सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, जो भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में यह राष्ट्रीय सम्मेलन उद्योग, सरकार और नीति निर्माताओं के बीच समन्वय का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। मजबूत नीतियों, स्थानीय विनिर्माण, आधुनिक तकनीक और सतत विकास के माध्यम से भारत आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकता है।