चेन्नई में ‘वन हेल्थ’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

चेन्नई में ‘वन हेल्थ’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

2 जुलाई 2026 से चेन्नई में “वन हेल्थ: इंटीग्रेटिंग हेल्थ सिक्योरिटी एंड बायोसिक्योरिटी” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन और टेबल-टॉप सिमुलेशन अभ्यास की शुरुआत हुई। इस सम्मेलन का आयोजन डेक्कन सेंटर फॉर इंटरनेशनल रिलेशंस ने एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन तथा आईएफएमआर/केआरईए यूनिवर्सिटी के लीड संस्थान के सहयोग से किया। सम्मेलन का उद्देश्य स्वास्थ्य सुरक्षा, जैव सुरक्षा और महामारी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित सहयोग को बढ़ावा देना था।

वन हेल्थ की अवधारणा और महत्व

वन हेल्थ एक समग्र और बहु-विषयक दृष्टिकोण है, जो मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानता है। यह अवधारणा विशेष रूप से जूनोटिक रोगों, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस तथा पर्यावरणीय निगरानी जैसे विषयों के अध्ययन और समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बदलते वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में यह मॉडल महामारी की रोकथाम और सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है।

राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन की भूमिका

भारत का राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण और विज्ञान से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस मिशन के अंतर्गत जूनोटिक रोगों की रोकथाम, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर नियंत्रण, जैव सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा भविष्य की संभावित महामारियों के लिए तैयारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर कार्य किया जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करना है।

सम्मेलन के प्रमुख विषय और सत्र

सम्मेलन में वन हेल्थ से जुड़े चार प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इनमें जीवविज्ञान, प्रौद्योगिकी और भविष्य के नवाचार, सुशासन, वैश्विक अनुभव एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं जैव सुरक्षा की आधारशिला के रूप में वन हेल्थ तथा जैव सुरक्षा, ड्यूल-यूज़ रिसर्च और प्रयोगशाला नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सुरक्षा और जैव सुरक्षा की तैयारी को परखने के लिए टेबल-टॉप सिमुलेशन अभ्यास का भी आयोजन किया गया, जिससे विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन किया जा सके।

सम्मेलन में प्रमुख हस्तियों की भागीदारी

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार सूद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में राजदूत टी.एस. तिरुमूर्ति तथा डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने भी भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सुरक्षा, वैश्विक सहयोग और वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वन हेल्थ एक बहु-विषयक ढांचा है, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को परस्पर जुड़ा हुआ मानता है।
  • जूनोटिक रोग वे संक्रमण हैं, जो पशुओं से मनुष्यों में या मनुष्यों से पशुओं में फैल सकते हैं।
  • एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस वह स्थिति है, जिसमें सूक्ष्मजीव उन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं जो पहले उन्हें नष्ट कर देती थीं या उनकी वृद्धि रोकती थीं।
  • जैव सुरक्षा का अर्थ ऐसे उपायों से है, जिनके माध्यम से हानिकारक जैविक कारकों के प्रवेश और प्रसार के जोखिम को कम किया जाता है।

वन हेल्थ की अवधारणा आज के समय में वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा की आधारशिला बनती जा रही है। भारत का राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन और इस प्रकार के सम्मेलन विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग को मजबूत बनाकर महामारी की रोकथाम, जैव सुरक्षा और सतत स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

Originally written on July 3, 2026 and last modified on July 3, 2026.

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