विकसित कर्नाटक के लिए प्रधानमंत्री का नौ-सूत्रीय एजेंडा, जनभागीदारी पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अप्रैल 2026 को कर्नाटक के श्री आदिचुंचनगिरी मठ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान “विकसित कर्नाटक” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नौ-सूत्रीय विकास एजेंडा प्रस्तुत किया। इस एजेंडे को “विकसित भारत” के व्यापक विजन से जोड़ा गया है, जिसमें नागरिक भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को समावेशी विकास के प्रमुख आधार के रूप में रेखांकित किया गया।
जल संरक्षण और पर्यावरण पर विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए विशेष रूप से कावेरी बेसिन पर निर्भर क्षेत्रों में इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने नागरिकों से जल के कुशल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए जागरूक रहने का आह्वान किया। पर्यावरण संरक्षण को सांस्कृतिक भावनाओं से जोड़ते हुए उन्होंने “मां के नाम एक पेड़” लगाने की पहल को प्रोत्साहित किया, जिससे जनभागीदारी को बढ़ावा मिल सके।
आत्मनिर्भरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने पर जोर दिया। उन्होंने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील भी की, ताकि लोग देश के विभिन्न हिस्सों को जान सकें और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। यह पहल राष्ट्रीय एकता और आर्थिक विकास दोनों को प्रोत्साहित करती है।
सतत कृषि और स्वस्थ जीवनशैली
कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से मंड्या जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों के किसानों को प्राकृतिक और रसायन मुक्त खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया। साथ ही, बढ़ती मोटापे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने पारंपरिक आहार जैसे रागी के सेवन को बढ़ावा देने, तेल की खपत कम करने और योग तथा खेलों के माध्यम से सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भरता को सशक्त करना है।
- कावेरी नदी दक्षिण भारत की प्रमुख जल स्रोतों में से एक है।
- प्राकृतिक खेती रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करती है।
- रागी एक पोषक अनाज है, जिसका उपयोग कर्नाटक में व्यापक रूप से किया जाता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सेवा (सेवा भाव) के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि समाज के उत्थान में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने आदिचुंचनगिरी मठ जैसी आध्यात्मिक संस्थाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास में योगदान की सराहना की। यह पहल दर्शाती है कि आधुनिक विकास और आध्यात्मिक मूल्यों का संतुलन ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगा।