वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी बने अंडमान एवं निकोबार कमांड के 20वें कमांडर-इन-चीफ
भारतीय सशस्त्र बलों के संयुक्त संचालन ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी, एवीएसएम ने 1 जून 2026 को श्री विजयापुरम में अंडमान एवं निकोबार कमांड (एएनसी) के 20वें कमांडर-इन-चीफ का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने वाइस एडमिरल अजय कोच्छर का स्थान लिया, जिन्होंने 25 मई 2026 को कमान छोड़ी थी और बाद में भारतीय नौसेना में वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ का पद संभाला। यह नियुक्ति भारत की समुद्री सुरक्षा और संयुक्त सैन्य संचालन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अंडमान एवं निकोबार कमांड का महत्व
अंडमान एवं निकोबार कमांड भारत की पहली और एकमात्र एकीकृत त्रि-सेवा कमांड है। इस कमांड में भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल के संसाधन और क्षमताएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य विभिन्न सैन्य शाखाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और संयुक्त अभियानों को प्रभावी बनाना है। भारत के सामरिक दृष्टिकोण से यह कमांड अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक स्थिति रखता है। यहां से समुद्री गतिविधियों की निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जाता है।
वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी का सैन्य करियर
वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी को 1 जुलाई 1989 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे गनरी और मिसाइल प्रणाली के विशेषज्ञ अधिकारी हैं तथा भारतीय नौसेना में 36 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उनकी नेतृत्व क्षमता और परिचालन अनुभव ने उन्हें भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों में विशेष पहचान दिलाई है। रक्षा क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
प्रमुख नियुक्तियां और नई जिम्मेदारियां
अंडमान एवं निकोबार कमांड का कार्यभार संभालने से पहले वाइस एडमिरल मैकार्टी कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। इनमें सहायक नौसेना प्रमुख (स्टाफ रिक्वायरमेंट्स), पश्चिमी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, भारतीय नौसेना अकादमी के कमांडेंट तथा कंट्रोलर पर्सोनल सर्विसेज जैसे पद शामिल हैं। नई जिम्मेदारी के तहत वे द्वीप क्षेत्रों में सैन्य परिसंपत्तियों के संचालन, विकास और आधुनिकीकरण की निगरानी करेंगे। ग्रेट निकोबार द्वीप सहित विभिन्न रणनीतिक परियोजनाओं और रक्षा अवसंरचना के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
सामरिक महत्व और समुद्री सुरक्षा
अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह पूर्वी हिंद महासागर में स्थित है और विश्व की प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्गों के निकट होने के कारण अत्यधिक रणनीतिक महत्व रखता है। यह क्षेत्र समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा, निगरानी और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। अंडमान एवं निकोबार कमांड संयुक्त सैन्य अभियानों, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों तथा द्वीप आधारित रक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए जिम्मेदार है। भारत की समुद्री रणनीति में इस कमांड का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अंडमान एवं निकोबार कमांड भारत की पहली और एकमात्र त्रि-सेवा कमांड है।
- भारतीय नौसेना के अधिकारियों को भारतीय नौसेना अकादमी और अन्य प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है।
- ग्रेट निकोबार द्वीप अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का दक्षिणतम प्रमुख द्वीप है।
- अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति को मजबूत करता है।
वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। उनके व्यापक अनुभव और नेतृत्व क्षमता से अंडमान एवं निकोबार कमांड को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह नियुक्ति भारत की समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य संचालन और क्षेत्रीय रणनीतिक हितों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।