लोहे को जंग और आग से एक साथ बचाएगा ये ‘जादुई लिक्विड’: IIT भिलाई और IIT पटना का कमाल
लोहे में जंग लगना और किसी इमारत या फैक्ट्री में आग लगना, ये दोनों ऐसी चुनौतियां हैं जो हर साल दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को अरबों रुपये का नुकसान पहुंचाती हैं। चाहे समंदर की लहरों के बीच खड़े बड़े-बड़े जहाज हों, पुल हों, या फिर हमारी गाड़ियां— जंग हर धातु को धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर देती है। वहीं दूसरी ओर, आग की एक छोटी सी चिंगारी पल भर में सब कुछ राख कर देती है। अब तक इन दोनों समस्याओं से निपटने के लिए अलग-अलग तरह के पेंट्स, केमिकल्स और कोटिंग्स का इस्तेमाल किया जाता था। यानी जंग से बचाना है तो एक अलग परत लगाओ, और आग से सुरक्षित रखना है तो एक अलग केमिकल का लेप लगाओ। लेकिन भारत के दो प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा जादुई ‘स्मार्ट पॉलीमर’ तैयार किया है, जो अकेला ही इन दोनों खतरों को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई और IIT पटना के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक ऐसा क्रांतिकारी कोटिंग मटेरियल विकसित किया है जो लोहे को जंग से भी बचाएगा और आग लगने पर उसे फैलने से भी रोकेगा।
क्या है यह ‘स्मार्ट पॉलीमर’ तकनीक और यह कैसे काम करती है?
सरल शब्दों में कहें तो वैज्ञानिकों ने एक ऐसा लिक्विड प्लास्टिक (पॉलीमर) तैयार किया है, जिसे किसी भी धातु की सतह पर पेंट की तरह लगाया जा सकता है। इस कोटिंग की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘स्मार्ट’ होना है। यह अपने आस-पास के माहौल को समझकर खुद को उसके अनुकूल ढाल लेती है। इस विशेष पॉलीमर को बनाने में फास्फोरस (Phosphorus) और फ्लोरीन (Fluorine) जैसे तत्वों का इस्तेमाल किया गया है। जब इस मिक्सचर को लोहे या किसी अन्य धातु पर लगाया जाता है, तो इसके भीतर मौजूद फास्फोरस धातु की सतह के साथ एक बेहद मजबूत केमिकल बॉन्ड बना लेता है। इस मजबूत पकड़ की वजह से यह कोटिंग आसानी से उखड़ती या छीलती नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, इसमें मौजूद फ्लोरीन हवा की नमी और पानी को धातु के संपर्क में आने से पूरी तरह रोक देता है। चूंकि जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और पानी की जरूरत होती है, इसलिए यह कोटिंग लोहे के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच बन जाती है।

आग लगते ही सक्रिय हो जाता है सुरक्षा तंत्र
इस स्मार्ट पॉलीमर का दूसरा और सबसे चमत्कारी पहलू है इसकी आग से लड़ने की क्षमता। जब भी इस कोटिंग वाली जगह पर आग लगती है या तापमान अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह पॉलीमर जलने की बजाय एक सुरक्षात्मक चार (Char) यानी कोयले जैसी मोटी परत में बदल जाता है। यह कोयले जैसी परत एक थर्मल बैरियर (गर्मी को रोकने वाली दीवार) की तरह काम करती है। यह अंदर मौजूद धातु तक आग की लपटों और उसकी भयंकर गर्मी को पहुंचने नहीं देती। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के दौरान जब इस कोटिंग से ढकी एक साधारण चीज को सीधे आग की लपटों के सामने रखा गया, तो न सिर्फ उसमें आग लगने में बहुत देरी हुई, बल्कि जैसे ही आग के स्रोत को हटाया गया, उसने खुद को तुरंत बुझा लिया (Self-extinguishing behavior)।

भारी-भरकम खर्च और परतों के झंझट से मुक्ति
औद्योगिक दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने के लिए उस पर कई तरह के कोटिंग्स की परतें चढ़ानी पड़ती थीं। पहली परत जंग रोकने के लिए, दूसरी परत मजबूती के लिए और तीसरी परत आग से सुरक्षा के लिए। इस बहुपरतीय (Multi-layered) प्रक्रिया के कारण कंपनियों का खर्च बहुत बढ़ जाता था और समय भी ज्यादा लगता था। IIT भिलाई के डिपार्टमेंट ऑफ केमिस्ट्री के डॉ. संजीव बनर्जी और IIT पटना के डॉ. सुब्रत चट्टोपाध्याय की अगुवाई वाली टीम ने इसी झंझट को खत्म किया है। उन्होंने अपनी रिसर्च में यह साबित कर दिखाया कि ये सारे गुण एक ही सिंगल लेयर कोटिंग के अंदर समाहित किए जा सकते हैं। इससे न केवल मैन्युफैक्चरिंग की लागत आधी हो जाएगी, बल्कि समय की भी बड़ी बचत होगी।
समंदर के खारे पानी में भी बेअसर रहा यह सुरक्षा कवच
इस तकनीक की ताकत को जांचने के लिए वैज्ञानिकों ने इसे बेहद कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में टेस्ट किया। प्रयोगशाला में इस कोटिंग को लगातार खारे पानी (साल्टवॉटर) के संपर्क में रखा गया और लंबे समय तक धूप, बारिश और बदलते मौसम के बीच खुला छोड़ दिया गया। आमतौर पर खारा पानी किसी भी कोटिंग को कुछ ही दिनों में नष्ट कर देता है, लेकिन इस स्मार्ट पॉलीमर ने अपनी पकड़ और प्रभावशीलता को बनाए रखा। यही वजह है कि इस तकनीक को समुद्री जहाजों, तटीय इलाकों के पुलों, और पानी के भीतर रहने वाले बड़े-बड़े स्ट्रक्चर्स के लिए एक वरदान माना जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध साइंस जर्नल ‘Advanced Functional Materials’ में इस शोध के प्रकाशित होने के बाद दुनिया भर के वैज्ञानिक भारत की इस कामयाबी की सराहना कर रहे हैं।
आत्मनिर्भर भारत और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
भारत इस समय अपने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को आधुनिक बनाने के लिए ‘पीएम गति शक्ति’ और ‘नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन’ जैसी विशाल योजनाओं पर काम कर रहा है। ऐसे में देश के भीतर ही ऐसी तकनीक का विकसित होना मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। यह कोटिंग आने वाले समय में हमारे ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की सुरक्षा, एयरोस्पेस इंडस्ट्री, डिफेंस और बड़ी इंडस्ट्रियल फैक्ट्रियों की सूरत बदल सकती है। जब देश की संपत्तियां जंग और आग से सुरक्षित रहेंगी, तो उनके मेंटेनेंस पर होने वाला देश का अरबों रुपया बचेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।
भारतीय वैज्ञानिकों के कुछ अन्य अनोखे आविष्कार
भारत के आईआईटी संस्थान पिछले कुछ समय से एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च में दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं। इसी कड़ी में IIT भिलाई की टीम ने हाल ही में एक ऐसा ‘सेल्फ-हीलिंग पॉलीमर’ भी विकसित किया है, जो किसी भी खरोंच या टूट-फूट को बिना किसी बाहरी गर्मी या ट्रीटमेंट के, कमरे के सामान्य तापमान पर खुद-ब-खुद ठीक (रिपेयर) कर लेता है। अगर इस पर कोई कट भी लग जाए, तो इसके दोनों हिस्सों को आपस में दबाकर रखने से यह फिर से पहले जैसा मजबूत हो जाता है। इसके अलावा, भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ‘स्मार्ट जेल’ भी बनाया है जिसे खिड़कियों के शीशों पर लगाने से वे तापमान के हिसाब से खुद अपनी पारदर्शिता बदल लेते हैं। यानी जब बाहर तेज धूप होगी तो शीशा धुंधला हो जाएगा ताकि अंदर गर्मी न आए और एसी का खर्च बच सके। यही जेल बिजली पैदा करने वाले छोटे उपकरणों में इलेक्ट्रोलाइट का काम भी कर सकता है। विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे ये स्वदेशी आविष्कार साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाला कल भारत के तकनीकी कौशल के दम पर और अधिक सुरक्षित और टिकाऊ होने वाला है।