भारतीय वन्यजीव संस्थान सोसायटी की 28वीं बैठक कोयंबटूर में आयोजित

भारतीय वन्यजीव संस्थान सोसायटी की 28वीं बैठक कोयंबटूर में आयोजित

भारतीय वन्यजीव संरक्षण और अनुसंधान को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) सोसायटी की पुनर्गठित 28वीं बैठक 9 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी (सीएएसएफओएस) में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की, जो भारतीय वन्यजीव संस्थान सोसायटी के अध्यक्ष भी हैं। इस बैठक में संस्थान की आगामी वैज्ञानिक प्राथमिकताओं, अनुसंधान कार्यों तथा वन्यजीव संरक्षण रणनीतियों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

भारतीय वन्यजीव संस्थान क्या है?

भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है। इसका मुख्यालय उत्तराखंड के देहरादून में स्थित है। यह संस्थान देश में वन्यजीव अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, प्रशिक्षण तथा वन्यजीव प्रबंधन से संबंधित तकनीकी और नीतिगत परामर्श प्रदान करने वाला प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र है। संस्थान वन अधिकारियों, शोधकर्ताओं और संरक्षण विशेषज्ञों को आधुनिक वन्यजीव प्रबंधन का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराता है।

तीन वर्ष के नए कार्यकाल की पहली बैठक

यह बैठक डब्ल्यूआईआई सोसायटी के पुनर्गठन के बाद आयोजित पहली बैठक थी। सोसायटी का नया कार्यकाल तीन वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है। पूर्व सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो गया था, जिसके बाद नामित और पदेन सदस्यों को शामिल करते हुए नई सोसायटी का गठन किया गया। बैठक के दौरान संस्थान के अनुसंधान, प्रशिक्षण और नीति सहयोग ढांचे को ‘विकसित भारत @ 2047’ की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप बनाने पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान, आधुनिक तकनीक आधारित वन्यजीव प्रबंधन और क्षमता निर्माण को भविष्य की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।

वैज्ञानिक रोडमैप और प्रमुख निर्णय

बैठक में भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक एवं सोसायटी के सदस्य-सचिव डॉ. जी. एस. भारद्वाज ने संस्थान की उपलब्धियों और वर्तमान कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। सोसायटी ने आगामी तीन वर्षों के लिए संस्थान के वैज्ञानिक रोडमैप और अनुसंधान एजेंडा को भी मंजूरी प्रदान की। संस्थान भविष्य में वन्यजीव अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों के प्रभावी प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े तकनीकी सहयोग को और अधिक मजबूत करेगा। बैठक में सांसद अतुल गर्ग तथा गुजरात के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) का मुख्यालय उत्तराखंड के देहरादून में स्थित है।
  • यह संस्थान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।
  • भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रमुख कारण आवासीय क्षेत्रों का विस्तार, भूमि उपयोग में परिवर्तन और प्राकृतिक आवासों का विखंडन माना जाता है।
  • वन्यजीव प्रबंधन में क्षमता निर्माण के अंतर्गत फील्ड इकोलॉजी, वन्यजीव कानून, जैव विविधता संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान सोसायटी की यह बैठक देश में वैज्ञानिक वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप अनुसंधान, तकनीक और क्षमता निर्माण पर केंद्रित यह रोडमैप भारत की जैव विविधता संरक्षण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Originally written on July 10, 2026 and last modified on July 10, 2026.

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