पारंपरिक खेती से बिजनेस मॉडल तक: PRAGATI मिशन कैसे बदलेगा 20 लाख किसानों की किस्मत

पारंपरिक खेती से बिजनेस मॉडल तक: PRAGATI मिशन कैसे बदलेगा 20 लाख किसानों की किस्मत

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का रास्ता महानगरों की ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि देश के गांवों और खेतों से होकर गुजरता है। जब तक देश का छोटा और सीमांत किसान आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होगा, तब तक देश की तरक्की अधूरी रहेगी। इसी सोच के साथ भारत सरकार, वैश्विक फाउंडेशन्स और कॉरपोरेट दिग्गजों ने मिलकर एक अभूतपूर्व आंदोलन की शुरुआत की है, जिसे ‘प्रगति’ (PRAGATI – Partnership for Regenerative Agriculture and Agri-Entrepreneurship Advancement) नाम दिया गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लॉन्च किए गए इस महत्वाकांक्षी मिशन का लक्ष्य देश के ग्रामीण इलाकों में 20,000 नए कृषि-उद्यमी (Agri-Entrepreneurs) तैयार करना है। ये 20,000 युवा केवल नौकरी की तलाश करने वाले नहीं होंगे, बल्कि ग्रामीण भारत के ‘चेंजमेकर’ बनेंगे, जो सीधे तौर पर 20 लाख से अधिक छोटे और सीमांत किसानों की जिंदगी बदलने का काम करेंगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह प्रगति पहल क्या है, इसका पूरा बिजनेस मॉडल क्या है और यह भारतीय कृषि व्यवस्था में किस तरह एक नई क्रांति लाने जा रहा है।

क्या है प्रगति मिशन और कैसे काम करेगा इसका ढांचा?

पारंपरिक रूप से भारतीय खेती हमेशा से मौसम की अनिश्चितता, बिचौलियों के जाल और आधुनिक तकनीक की कमी से जूझती रही है। एक छोटे किसान के लिए यह मुमकिन नहीं होता कि वह अपनी दो एकड़ जमीन के लिए मिट्टी की एडवांस जांच कराए, महंगी मशीनें खरीदे या सीधे बड़े शहरों की मंडियों तक अपनी फसल पहुंचाए। प्रगति मिशन इसी गैप को भरने की एक सोची-समझी रणनीति है। यह कोई साधारण सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह एक ‘मल्टी-स्टेकहोल्डर कोएलिशन’ है। इसमें भारत सरकार के साथ-साथ पेप्सिको फाउंडेशन (PepsiCo Foundation), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBI Foundation), गेट्स फाउंडेशन, हेफ़र इंटरनेशनल, और एनवायर्नमेंटल डिफेंस फंड (EDF) जैसे वैश्विक संगठन एक साथ आए हैं। इस मिशन का सबसे बड़ा आधार है—गांव के ही युवाओं और महिलाओं को चुनकर उन्हें प्रोफेशनल ट्रेनिंग और संसाधन देना, ताकि वे अपने क्षेत्र में एक स्वतंत्र बिजनेस खड़ा कर सकें। इन प्रशिक्षित युवाओं को ‘कृषि-उद्यमी’ कहा जाएगा। ये युवा गांवों में 20,000 विशेष कियोस्क (Kiosks) या वन-स्टॉप सर्विस सेंटर स्थापित करेंगे।

क्या है प्रगति मिशन और कैसे काम करेगा इसका ढांचा?

गांव के कियोस्क: किसानों के लिए सुपरमार्केट जैसे सर्विस सेंटर

ये 20,000 कृषि-उद्यमी अपने-अपने गांवों में जो कियोस्क खोलेंगे, वे किसानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होंगे। एक ही छत के नीचे किसानों को वह सब कुछ मिलेगा जिसके लिए उन्हें पहले ब्लॉक मुख्यालय या बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ते थे।

गांव के कियोस्क: किसानों के लिए सुपरमार्केट जैसे सर्विस सेंटर
सॉइल हेल्थ और एग्रोनॉमी एडवाइजरी

किसान अक्सर बिना सोचे-समझे खेतों में यूरिया और डीएपी जैसे खाद झोंक देते हैं। ये कियोस्क मिट्टी की सेहत की जांच करेंगे और डेटा के आधार पर बताएंगे कि किस फसल को किस न्यूट्रिशन की जरूरत है।

फार्म मैकेनाइजेशन (मशीनीकरण)

छोटे किसानों के पास ट्रैक्टर, हार्वेस्टर या आधुनिक ड्रोन खरीदने के पैसे नहीं होते। ये कृषि-उद्यमी इन महंगी मशीनों को किराए (Custom Hiring) पर किसानों को उपलब्ध कराएंगे, जिससे खेती की लागत में भारी कमी आएगी।

क्रेडिट और इंश्योरेंस लिंकेज

गांवों में आज भी किसान साहूकारों के कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। एसबीआई फाउंडेशन की मदद से ये कियोस्क किसानों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ेंगे, जिससे उन्हें आसानी से लोन, फसल बीमा और केसीसी (Kisan Credit Card) जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।

डायरेक्ट मार्केट एक्सेस

फसल कटने के बाद बिचौलिए कौड़ियों के दाम पर अनाज खरीद लेते हैं। ये एग्री-एंटरप्रेन्योर्स कॉर्पोरेट खरीदारों और बड़ी मंडियों के साथ सीधे संपर्क स्थापित करेंगे, जिससे किसानों को उनकी उपज का सही और अधिकतम मूल्य मिल सकेगा।

इस मिशन के 4 सबसे बड़े और मापने योग्य लक्ष्य

प्रगति मिशन केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि कंक्रीट डेटा और रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर आधारित है। इस पूरे प्रोजेक्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके नतीजे साफ तौर पर जमीन पर दिखाई दें। इसके तहत मुख्य रूप से चार बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं।

किसानों की आय में 30% की बढ़ोतरी

इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य हर जुड़े हुए किसान की शुद्ध आय में कम से कम 30 प्रतिशत का इजाफा करना है। यह आय केवल उत्पादन बढ़ाकर नहीं, बल्कि खेती की लागत को कम करके हासिल की जाएगी।

मुख्य फसलों की पैदावार में 15 से 20% का उछाल

वैज्ञानिक तरीकों, सटीक खाद प्रबंधन और बेहतर बीजों के इस्तेमाल से धान (Paddy), मक्का (Maize) और आलू (Potato) जैसी मुख्य फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी का लक्ष्य है।

20% किसानों द्वारा रीजनेरेटिव फार्मिंग अपनाना

इस मिशन के तहत कम से कम 20 प्रतिशत किसानों को ‘पुनर्योजी कृषि’ यानी रीजनेरेटिव फार्मिंग (Regenerative Agriculture) की तरफ मोड़ा जाएगा। यह एक ऐसी पर्यावरण-अनुकूल पद्धति है जो जमीन की उपजाऊ शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है और पानी की खपत को कम करती है।

डिजिटल और वित्तीय साक्षरता

मिशन से जुड़े कम से कम 50 प्रतिशत किसानों को डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और वित्तीय प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

किन राज्यों से हो रही है शुरुआत और क्या है इसका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड?

यह देशव्यापी आंदोलन अचानक शून्य से शुरू नहीं हो रहा है। प्रगति मिशन को भारत के 14 राज्यों में पहले से चल रहे ‘एग्रीकल्चर एंटरप्रेन्योरशिप (AE) मॉडल’ की सफलताओं और अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है। वर्तमान में देश के भीतर पहले से ही 26,000 से अधिक एग्री-एंटरप्रेन्योर्स का एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है, जो करीब 26 लाख किसानों की मदद कर रहा है। अब प्रगति मिशन के तहत इस नेटवर्क का विस्तार करते हुए इसमें 20,000 नए उद्यमी जोड़े जा रहे हैं। शुरुआत में इस कार्यक्रम को भारत के उन चुनिंदा राज्यों पर केंद्रित किया गया है जहां छोटे और सीमांत किसानों की संख्या सबसे ज्यादा है और जहां कृषि सुधारों की सबसे ज्यादा जरूरत है।

राज्य का नाम फोकस का मुख्य कारण
उत्तर प्रदेश और बिहार देश की सबसे बड़ी ग्रामीण आबादी और छोटे खेतों का बड़ा क्लस्टर।
मध्य प्रदेश और राजस्थान दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों (Millets) के उत्पादन का बड़ा केंद्र।
पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड धान की खेती और बागवानी (Horticulture) की अपार संभावनाएं।
महाराष्ट्र नकदी फसलों (Cash Crops) और एग्री-प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए मजबूत बाजार।

ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का नया विकल्प

आज के समय में गांवों का सबसे बड़ा संकट यह है कि वहां का युवा खेती को घाटे का सौदा मानकर शहरों की तरफ पलायन कर रहा है। वे मजदूरी करने को तैयार हैं, लेकिन पारंपरिक तरीकों से खेती नहीं करना चाहते। प्रगति मिशन इसी सोच को बदल रहा है। यह खेती को ‘मजबूरी’ से हटाकर एक ‘आकर्षक बिजनेस’ (Aspirational Choice) बना रहा है। इस मिशन में ग्रामीण युवाओं के साथ-साथ महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। जब गांव की ही एक पढ़ी-लिखी बेटी या बेटा अपने घर पर रहकर टेक्नोलॉजी, ड्रोन और डिजिटल टूल्स के जरिए एग्री-बिजनेस सेंटर चलाएगा, तो वह समाज के लिए एक रोल मॉडल बनेगा। इससे न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पैसों का रोटेशन बढ़ेगा, बल्कि शहरों की तरफ होने वाला पलायन भी रुकेगा।

खेती का भविष्य: क्लाइमेट-स्मार्ट और डेटा-ड्रिवेन अप्रोच

ग्लोबल वार्मिंग और बदलते मौसम के मिजाज ने पारंपरिक खेती के सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। कभी अचानक भारी बारिश हो जाती है तो कभी लंबा सूखा पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में प्रगति मिशन की ‘क्लाइमेट-स्मार्ट’ और ‘डेटा-ड्रिवेन’ अप्रोच सबसे ज्यादा कारगर साबित होगी। इन कियोस्क के जरिए किसानों को मौसम का सटीक पूर्वानुमान, कीटों के हमले की अग्रिम चेतावनी और पानी के सही इस्तेमाल की सैटेलाइट आधारित जानकारियां मिलेंगी। इसके अलावा, पेप्सिको जैसी बड़ी कंपनियों के जुड़ने से किसानों को यह पहले से पता होगा कि बाजार में किस खास वैरायटी की फसल की मांग है, जिससे वे वही उगाएंगे जो हाथों-हाथ बिक जाए। कॉर्पोरेट जगत की इस सप्लाई चेन और सरकार के विजन का यह अनूठा संगम भारत के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने की पूरी क्षमता रखता है।

Originally written on July 10, 2026 and last modified on July 10, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *