लोकसभा से कर कानून संशोधन विधेयक पारित, डिजिटल भुगतान और इलेक्ट्रॉनिक्स निवेश को राहत
लोकसभा ने 6 अगस्त 2026 को टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित कर दिया। यह विधेयक भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करता है। सरकार ने इसे 5 जून 2026 को जारी अध्यादेश की जगह लाने के लिए पेश किया था।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को कर राहत
विधेयक का एक अहम प्रावधान इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़ा है। इसके तहत भारत में अनुबंधित विनिर्माण कराने वाली विदेशी कंपनियों को आयकर छूट 2040-41 तक बढ़ा दी गई है। इसके दायरे में वे विदेशी कंपनियां भी आएंगी जो भारतीय निर्माताओं को आपूर्ति के लिए अपने घटक कस्टम्स वेयरहाउस में रखती हैं। यह कदम घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा देने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।
डिजिटल भुगतान ढांचे में सरकार को अधिक लचीलापन
विधेयक में यूपीआई और रुपे कार्ड लेनदेन पर लागू शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR व्यवस्था में बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार को वैधानिक आधार दिया गया है। साथ ही, सरकार यह तय कर सकेगी कि कौन-कौन से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम शुल्क-मुक्त बने रहेंगे। इससे डिजिटल भुगतान नीति को समय-समय पर आर्थिक जरूरतों और भुगतान प्रणाली के विकास के अनुसार ढालने की सुविधा मिलेगी।
विदेशी निवेशकों और सरकारी प्रतिभूतियों पर कर प्रावधान
इस विधेयक में विदेशी संस्थागत निवेशकों और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स को भी राहत दी गई है। 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से होने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर उन्हें आयकर से छूट मिलेगी। यह प्रावधान सरकारी बॉन्ड बाजार में विदेशी भागीदारी को प्रोत्साहित करने और दीर्घकालिक निवेश प्रवाह को समर्थन देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 भारत में इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर और कार्ड-आधारित भुगतान प्रणालियों को नियंत्रित करता है।
- UPI का पूरा नाम Unified Payments Interface है, जबकि RuPay भारत की घरेलू कार्ड भुगतान प्रणाली है।
- MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाता है।
- बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स स्विट्जरलैंड के बेसल में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है।
संवैधानिक दृष्टि से भी यह विधेयक महत्वपूर्ण है, क्योंकि धन विधेयक और कराधान से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 110 के दायरे में आते हैं। कर कानूनों में ऐसे संशोधन आम तौर पर वार्षिक वित्तीय ढांचे का हिस्सा होते हैं और आर्थिक नीति की दिशा को प्रभावित करते हैं।