लोकसभा में 850 सीटों का प्रस्ताव, महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा बड़ा बदलाव

लोकसभा में 850 सीटों का प्रस्ताव, महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा बड़ा बदलाव

केंद्र सरकार ने लोकसभा की संरचना में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है, जिसके तहत सदन की कुल सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है। यह प्रस्ताव महिला आरक्षण को लागू करने और नए परिसीमन अभ्यास से जुड़ा हुआ है। इसके लिए एक मसौदा संवैधानिक संशोधन विधेयक सांसदों के बीच साझा किया गया है, जिस पर विशेष तीन दिवसीय सत्र में चर्चा होने की संभावना है।

विस्तारित लोकसभा की प्रस्तावित संरचना

प्रस्ताव के अनुसार, कुल 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाएंगी। यह बदलाव 2029 के आम चुनावों से लागू होने की संभावना है। इस विस्तार का उद्देश्य देश की बढ़ती जनसंख्या और बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप को बेहतर तरीके से प्रतिनिधित्व देना है।

महिला आरक्षण और राजनीतिक रणनीति

लोकसभा की सीटों में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना है। यदि सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो आरक्षण लागू करने के दौरान मौजूदा सांसदों की सीटों में कटौती की आवश्यकता नहीं होगी। इससे राजनीतिक दलों और नेताओं की चिंताओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।

परिसीमन और जनगणना का आधार

इस प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परिसीमन प्रक्रिया है, जिसके तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने की योजना बना रही है। हालांकि, विपक्षी दलों का तर्क है कि यह प्रक्रिया 2021 की जनगणना के आधार पर होनी चाहिए, जिसके आंकड़े अभी तक जारी नहीं किए गए हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • संविधान का अनुच्छेद 81 लोकसभा की संरचना को परिभाषित करता है।
  • परिसीमन प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करती है।
  • भारत में पिछला परिसीमन 2002 में 2001 की जनगणना के आधार पर किया गया था।
  • महिला आरक्षण विधेयक के तहत 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है।

इस प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं, जिनमें समय और परिसीमन के आधार को लेकर आपत्तियां शामिल हैं। साथ ही, पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग भी सामने आई है। चूंकि संवैधानिक संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत और राज्यों की मंजूरी आवश्यक होती है, इसलिए सरकार को इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति बनानी होगी।

Originally written on April 16, 2026 and last modified on April 16, 2026.

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