लेबनान में मृत्युदंड खत्म, पश्चिम एशिया में ऐतिहासिक बदलाव
लेबनान की संसद ने 11 अगस्त 2026 को मृत्युदंड को समाप्त करने के पक्ष में मतदान कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया। 128 सदस्यीय संसद ने पूंजी दंड की जगह आजीवन कारावास और गंभीर श्रम के साथ सजा का प्रावधान करने वाला विधेयक मंजूर किया। यह फैसला पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व और अरब दुनिया में किसी देश द्वारा मृत्युदंड को कानूनन खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
क्या बदलेगा नया कानून
यह विधेयक सांसद अब्दुल रहमान अल-बिज़री ने पेश किया था और इसे पहली बार अक्टूबर 2025 में संसद में रखा गया था। नए प्रावधान के तहत कानून लागू होने से पहले किए गए अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा होगी, जबकि कानून लागू होने के बाद होने वाले अपराधों के लिए गंभीर श्रम के साथ आजीवन कारावास का प्रावधान रहेगा।
हालांकि संसद की मंजूरी के बाद भी यह कानून तुरंत प्रभावी नहीं होगा। इसे प्रधानमंत्री नवाफ सलाम की अगुवाई वाली कैबिनेट की मंजूरी और राष्ट्रपति जोसेफ आउन के हस्ताक्षर की जरूरत होगी। इसके बाद ही यह औपचारिक रूप से लागू माना जाएगा।
राजनीतिक विरोध और मानवाधिकार संदर्भ
मतदान के दौरान हिज़्बुल्लाह के संसदीय गुट ने विधेयक का विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बावजूद बहुमत ने मृत्युदंड समाप्त करने के पक्ष में रुख अपनाया। लेबनान में जनवरी 2004 से फांसी पर व्यावहारिक रोक लगी हुई थी, लेकिन मृत्युदंड कानूनी व्यवस्था का हिस्सा बना हुआ था।
न्याय मंत्री आदेल नास्सार ने संसद के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और यूरोपीय संघ ने भी इस मतदान का स्वागत किया। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मृत्युदंड को खत्म करना न्याय व्यवस्था में सुधार और दंड नीति को अधिक मानवीय बनाने की दिशा में अहम कदम है।
क्षेत्रीय स्तर पर इसका महत्व
लेबनान अब ऐसा पहला पश्चिम एशियाई, मध्य पूर्वी या अरब देश बन गया है जिसने कानून बनाकर मृत्युदंड को समाप्त किया है। अरब लीग के सदस्य देशों में जिबूती दूसरा देश है जिसने मृत्युदंड खत्म किया था। इस फैसले से क्षेत्र में दंड सुधार और आपराधिक न्याय व्यवस्था पर नई बहस तेज होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लेबनान की संसद में कुल 128 सदस्य होते हैं।
- मृत्युदंड को अंग्रेजी में Death Penalty या Capital Punishment कहा जाता है।
- लेबनान में जनवरी 2004 से फांसी नहीं दी गई है, यानी वहां लंबे समय से de facto moratorium लागू था।
- अरब लीग के सदस्य देशों में जिबूती मृत्युदंड समाप्त करने वाला दूसरा देश है।
लेबनान का यह कदम केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि दंड नीति और मानवाधिकारों के बीच संतुलन पर क्षेत्रीय बहस को भी नई दिशा देता है।