लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया
भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर Suraj Prashar को उनकी अदम्य वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 8 जून 2026 को Droupadi Murmu द्वारा रक्षा अलंकरण समारोह 2026 (फेज-1) के दौरान प्रदान किया गया। समारोह का आयोजन Rashtrapati Bhavan में किया गया, जहां देश के सशस्त्र बलों के वीर जवानों और अधिकारियों को उनके उत्कृष्ट साहस और सेवा के लिए सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि भारतीय नौसेना और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
ऑपरेशन चुन्टावाड़ी में दिखाई असाधारण बहादुरी
लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार को यह सम्मान जम्मू-कश्मीर के Bandipora district में 5/6 नवंबर 2024 की रात संचालित ऑपरेशन चुन्टावाड़ी के दौरान प्रदर्शित साहस के लिए प्रदान किया गया। यह एक संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान था, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी खतरों को समाप्त करना था। अभियान के दौरान सुरक्षा बलों का सामना दो आतंकवादियों से हुआ और कठिन परिस्थितियों में कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। ऐसे अभियानों में त्वरित निर्णय, उच्च स्तर का प्रशिक्षण और असाधारण धैर्य आवश्यक होता है।
शौर्य चक्र का महत्व
शौर्य चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने शांति काल में असाधारण बहादुरी, साहसिक कार्य या कर्तव्य के प्रति समर्पण का परिचय दिया हो। यह पुरस्कार सैन्य कर्मियों के साथ-साथ नागरिकों को भी प्रदान किया जा सकता है। भारत की वीरता पुरस्कार प्रणाली में शौर्य चक्र का स्थान कीर्ति चक्र के बाद आता है और यह सेना, नौसेना तथा वायु सेना पदकों से ऊपर माना जाता है। यह सम्मान देश की सुरक्षा और सेवा में योगदान देने वाले व्यक्तियों के साहस को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान करता है।
मरीन कमांडो फोर्स (मार्कोस) की भूमिका
लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार भारतीय नौसेना की विशेष बल इकाई मरीन कमांडो फोर्स, जिसे मार्कोस के नाम से जाना जाता है, से जुड़े रहे हैं। मार्कोस भारतीय नौसेना की सबसे प्रतिष्ठित विशेष अभियान इकाइयों में से एक है। इसका गठन वर्ष 1987 में किया गया था। यह बल समुद्री विशेष अभियानों, टोही मिशनों, आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयों और संवेदनशील सुरक्षा अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। मार्कोस कमांडो अपनी कठिन ट्रेनिंग और उच्च स्तर की कार्यक्षमता के लिए विश्वभर में पहचान रखते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- शौर्य चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है।
- Rashtrapati Bhavan में राष्ट्रीय स्तर के कई महत्वपूर्ण सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं।
- Bandipora district जम्मू-कश्मीर में स्थित एक महत्वपूर्ण जिला है।
- मार्कोस का गठन वर्ष 1987 में भारतीय नौसेना की विशेष अभियान इकाई के रूप में किया गया था।
- रक्षा अलंकरण समारोह में वीरता पुरस्कारों और विशिष्ट सेवा अलंकरणों का वितरण किया जाता है।
रक्षा अलंकरण समारोह 2026 में देश के वीर सैनिकों और अधिकारियों के योगदान को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ Narendra Modi और Rajnath Singh भी उपस्थित रहे। लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज प्रशार को मिला शौर्य चक्र न केवल उनकी व्यक्तिगत वीरता का सम्मान है, बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना का भी प्रतीक है।