लिपुलेख मार्ग पर नेपाल का विरोध, भारत-नेपाल सीमा विवाद फिर चर्चा में

लिपुलेख मार्ग पर नेपाल का विरोध, भारत-नेपाल सीमा विवाद फिर चर्चा में

हाल ही में नेपाल ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के माध्यम से आयोजित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई है और इस मुद्दे को भारत तथा चीन के समक्ष कूटनीतिक विरोध के जरिए उठाया है। यह विवाद एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा से जुड़े पुराने मतभेदों को उजागर करता है, जो ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

लिपुलेख दर्रा और यात्रा मार्ग

लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित एक ऊंचाई वाला पहाड़ी मार्ग है, जो भारत-चीन-नेपाल त्रि-जंक्शन के पास स्थित है। भारत 1954 से इस मार्ग का उपयोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए करता आ रहा है। यह मार्ग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सीमावर्ती व्यापार और आवाजाही के लिए भी उपयोगी रहा है।

क्षेत्रीय दावे और सुगौली संधि

नेपाल का दावा है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसके समर्थन में वह 1816 की सुगौली संधि का हवाला देता है, जो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच एंग्लो-नेपाल युद्ध के बाद हुई थी। यह संधि भारत-नेपाल सीमा निर्धारण का एक प्रमुख ऐतिहासिक दस्तावेज मानी जाती है।

भारत-नेपाल सीमा विवाद

भारत ने नेपाल के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यह ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित नहीं है। भारत का यह भी कहना है कि लिपुलेख दर्रे का उपयोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दशकों से किया जा रहा है और इसमें कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। कालापानी और लिम्पियाधुरा जैसे क्षेत्र इस सीमा विवाद के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।

हालिया घटनाक्रम

2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त के बीच आयोजित होने वाली है, जिसमें 10 समूहों में 50-50 श्रद्धालुओं को इस मार्ग से ले जाने की योजना है। नेपाल ने अगस्त 2025 के बाद दूसरी बार इस मार्ग पर आपत्ति दर्ज कराई है, जब भारत और चीन ने लिपुलेख के माध्यम से व्यापार मार्ग की घोषणा की थी। यह घटनाक्रम क्षेत्रीय संबंधों में तनाव को दर्शाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है।
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा तिब्बत क्षेत्र में स्थित पर्वत कैलाश और मानसरोवर झील से जुड़ी है।
  • 1816 की सुगौली संधि भारत-नेपाल सीमा विवाद का आधार है।
  • कालापानी और लिम्पियाधुरा भारत-नेपाल सीमा के विवादित क्षेत्र हैं।

लिपुलेख मार्ग को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर भारत और नेपाल के बीच सीमा निर्धारण के मुद्दे को प्रमुखता से सामने ला दिया है। दोनों देशों के लिए यह आवश्यक है कि वे कूटनीतिक संवाद के माध्यम से इस संवेदनशील विषय का समाधान निकालें, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग बना रहे।

Originally written on May 4, 2026 and last modified on May 4, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *