रेल नेटवर्क को नई रफ्तार, 20,804 करोड़ की आठ परियोजनाओं को मंजूरी

रेल नेटवर्क को नई रफ्तार, 20,804 करोड़ की आठ परियोजनाओं को मंजूरी

केंद्र सरकार ने भारतीय रेल की क्षमता बढ़ाने के लिए 20,804 करोड़ रुपये की आठ मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 9 सितंबर 2026 को यह फैसला लिया। इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क में लगभग 1,196 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी और इन्हें वित्त वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्यों जरूरी है यह विस्तार

भारतीय रेल में मल्टी-ट्रैकिंग का मतलब मौजूदा रेलमार्गों पर अतिरिक्त लाइनें जोड़ना है, ताकि भीड़भाड़ कम हो और ट्रेनों की आवाजाही तेज हो सके। इनमें थर्ड लाइन, फोर्थ लाइन और डबलिंग जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। ऐसे काम खास तौर पर उन रूटों पर किए जाते हैं जहां यात्री और मालगाड़ियों का दबाव लगातार बढ़ रहा हो।

इस पैकेज का बड़ा हिस्सा दक्षिण भारत और पूर्वी-मध्य भारत के महत्वपूर्ण रेल गलियारों पर केंद्रित है। सरकार के अनुसार, ये परियोजनाएं न केवल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाएंगी, बल्कि लंबी दूरी की कनेक्टिविटी और समयबद्ध संचालन को भी बेहतर बनाएंगी।

किन राज्यों को मिलेगा सीधा लाभ

स्वीकृत परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हैं—तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़। इनमें दक्षिण भारत की पांच परियोजनाओं पर लगभग 10,021 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इनकी कुल लंबाई 540 किलोमीटर होगी।

इनमें अरक्कोनम–रेनीगुंटा थर्ड और फोर्थ लाइन तथा होसुर–ओमलूर सेक्शन की डबलिंग जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। वहीं पूर्वी और मध्य भारत की तीन परियोजनाओं पर 10,783 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च है और इनकी लंबाई 656 किलोमीटर होगी। इनमें खड़गपुर–झारसुगुड़ा फोर्थ लाइन और कटनी–पेंड्रा रोड फोर्थ लाइन प्रमुख हैं।

माल ढुलाई और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर असर

इन परियोजनाओं से भारतीय रेल की संयुक्त माल ढुलाई क्षमता में 74 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इन रूटों से कोयला, सीमेंट, लोहा, इस्पात और खाद्यान्न जैसी प्रमुख वस्तुओं की ढुलाई होती है। इसलिए इन लाइनों का विस्तार औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला और कृषि-आधारित परिवहन दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।

सरकारी आकलन के मुताबिक, इन परियोजनाओं से 31 जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और करीब 6,911 गांवों को लाभ मिलेगा। यह काम पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत अवसंरचना विकास है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CCEA की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और यह आर्थिक महत्व की बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी देती है।
  • भारतीय रेल में थर्ड लाइन, फोर्थ लाइन और डबलिंग का उपयोग व्यस्त मार्गों की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का संबंध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर समन्वय से है।
  • भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े एकल-प्रबंधन वाले रेल नेटवर्कों में से एक है।

इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क की भीड़ कम होने, माल ढुलाई की गति बढ़ने और प्रमुख औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद है।

Originally written on September 9, 2026 and last modified on September 9, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *