राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025: इस बार खेल रत्न खाली, अर्जुन और द्रोणाचार्य सम्मान चर्चा में

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025: इस बार खेल रत्न खाली, अर्जुन और द्रोणाचार्य सम्मान चर्चा में

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 की घोषणा कर दी है। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने 18 अगस्त 2026 को चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर विजेताओं की सूची जारी की। इस बार सबसे बड़ी बात यह रही कि देश के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न के लिए कोई नाम चयनित नहीं किया गया, जबकि अर्जुन, द्रोणाचार्य और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार श्रेणियों में कई खिलाड़ियों, कोचों और संस्थानों को सम्मानित किया गया है।

खेल रत्न पर नहीं हुआ चयन

मेजर ध्यानचंद खेल रत्न भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान है। यह पुरस्कार उन खिलाड़ियों को दिया जाता है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असाधारण उपलब्धि हासिल की हो। 2025 की सूची में इस श्रेणी में किसी भी विजेता का नाम शामिल नहीं किया गया। यह निर्णय इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि खेल रत्न को भारतीय खेल जगत में सर्वोच्च मान्यता माना जाता है।

अर्जुन पुरस्कार में 17 खिलाड़ियों को सम्मान

अर्जुन पुरस्कार लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दिया जाता है। 2025 के लिए 17 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। इनमें विदित गुजराती, दिव्या देशमुख, तेजस्विन शंकर, गायत्री गोपीचंद और त्रीसा जॉली जैसे नाम शामिल हैं। यह सूची भारत के विविध खेलों में उभरती प्रतिभा और निरंतर प्रदर्शन को दर्शाती है।

अर्जुन पुरस्कार (लाइफटाइम) श्रेणी में पूर्व फुटबॉलर और कोच आई. अरुमैनायगम को एकमात्र विजेता चुना गया है। 1962 एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता रहे अरुमैनायगम का योगदान भारतीय फुटबॉल और कोचिंग दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण माना जाता है।

कोचों और खेल प्रोत्साहन को भी मिला सम्मान

द्रोणाचार्य पुरस्कार भारत में कोचों के लिए दिया जाने वाला प्रमुख सम्मान है। यह नाम महाभारत के गुरु द्रोणाचार्य से लिया गया है। नियमित श्रेणी में तीन कोचों का चयन हुआ है—एथलेटिक्स के लिए परवीर सिंह, बॉक्सिंग के लिए छोटे लाल यादव और शूटिंग के लिए नेहा नंदकुमार चव्हाण। लाइफटाइम श्रेणी में बॉक्सिंग के धर्मेंद्र सिंह यादव और कुश्ती के वीरेंद्र कुमार को चुना गया है।

राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार उन संस्थानों, कॉरपोरेट निकायों और संगठनों को दिया जाता है जो खेलों के विकास और प्रोत्साहन में योगदान देते हैं। 2025 के लिए पुणे स्थित आर्मी पैरा ओलंपिक नोड को इस श्रेणी में चुना गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मेजर ध्यानचंद खेल रत्न की शुरुआत 1991 में हुई थी और 2021 में इसका नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा गया।
  • अर्जुन पुरस्कार की स्थापना 1961 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने खेल सम्मानों में शामिल है।
  • द्रोणाचार्य पुरस्कार की शुरुआत 1985 में उत्कृष्ट कोचों को सम्मानित करने के लिए की गई थी।
  • राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार की स्थापना 2009 में खेलों के विकास और प्रोत्साहन के लिए की गई थी।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की प्रक्रिया में इस बार भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से नामांकन लिए गए। चयन समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने की। इन पुरस्कारों की प्रशासनिक जिम्मेदारी युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के पास है।

Originally written on August 18, 2026 and last modified on August 18, 2026.

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