राजस्थान में बाघों की संख्या 149 पहुंची, संरक्षण की रफ्तार हुई तेज

राजस्थान में बाघों की संख्या 149 पहुंची, संरक्षण की रफ्तार हुई तेज

राजस्थान में बाघों की संख्या बढ़कर 149 हो गई है। 28 जुलाई 2026 तक राज्य के पांच टाइगर रिजर्व में यह आंकड़ा दर्ज किया गया, जो 2025 के 135 बाघों की तुलना में अधिक है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस से ठीक पहले जारी यह आंकड़ा राज्य में बाघ संरक्षण, प्रजनन और आवास प्रबंधन की स्थिति को दर्शाता है।

राज्य के पांच टाइगर रिजर्व में बढ़ी मौजूदगी

राजस्थान में इस समय रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व हैं। इनमें रणथंभौर राज्य का सबसे बड़ा बाघ आवास बना हुआ है, जहां 2026 में 72 बाघ दर्ज किए गए, जबकि 2025 में यह संख्या 66 थी। सरिस्का में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई और यहां बाघों की संख्या 50 से बढ़कर 56 पहुंच गई। यह वृद्धि केवल वयस्क बाघों की नहीं, बल्कि शावकों की मौजूदगी को भी दिखाती है। राज्य के वन्यजीव तंत्र में यह संकेत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे पता चलता है कि संरक्षण क्षेत्र में प्रजनन की स्थिति बनी हुई है।

प्रजनन के आंकड़े और आबादी की संरचना

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी. अरुण प्रसाद के अनुसार, 28 जुलाई 2026 तक पांचों टाइगर रिजर्व में 54 बाघिनों ने 53 शावकों को जन्म दिया। पिछले वर्ष 52 बाघिनों ने 43 शावकों को जन्म दिया था। कुल 149 बाघों में लगभग 96 वयस्क हैं और शेष शावक हैं। यह संरचना बताती है कि राजस्थान में बाघों की संख्या केवल स्थिर नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी भी तैयार हो रही है। वन्यजीव प्रबंधन के लिहाज से यह एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि किसी भी टाइगर रिजर्व की दीर्घकालिक सफलता प्रजनन और शावकों के जीवित रहने पर निर्भर करती है।

आवास क्षमता और संरक्षण की चुनौती

रणथंभौर टाइगर रिजर्व की अनुमानित वहन क्षमता 40 से 50 बाघों की मानी जाती है, जबकि वर्तमान संख्या 72 तक पहुंच गई है। वहन क्षमता का अर्थ है किसी आवास में उपलब्ध शिकार, पानी और जगह के आधार पर अधिकतम कितने बाघ रह सकते हैं। जब संख्या क्षमता से ऊपर जाती है, तो बाघों के आसपास के जंगलों में फैलने की संभावना बढ़ जाती है। इसी कारण बाघ संख्या बढ़ना जितना उत्साहजनक है, उतना ही प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण भी है। ऐसे में शिकार आधार, जल स्रोत, गलियारे और मानव-वन्यजीव संघर्ष की निगरानी और भी अहम हो जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में बाघ संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत 1973 में की गई थी।
  • अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस हर साल 29 जुलाई को मनाया जाता है।
  • भारत में बाघों की गणना और निगरानी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के ढांचे के तहत की जाती है।
  • रणथंभौर टाइगर रिजर्व राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध और बड़ा बाघ आवासों में से एक है।

राजस्थान में बाघों की बढ़ती संख्या संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है, लेकिन साथ ही यह भी याद दिलाती है कि आबादी के साथ आवास प्रबंधन, गलियारों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संतुलन बनाए रखना उतना ही जरूरी है।

Originally written on July 29, 2026 and last modified on July 29, 2026.

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