रतनगढ़ किले के संरक्षण से भद्रवाह की विरासत को नई पहचान

रतनगढ़ किले के संरक्षण से भद्रवाह की विरासत को नई पहचान

जम्मू-कश्मीर सरकार ने भद्रवाह स्थित ऐतिहासिक रतनगढ़ किले के मरम्मत, नवीनीकरण और पुनर्स्थापन के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह कदम न केवल एक पुरानी धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में अहम है, बल्कि चेनाब घाटी में पर्यटन और विरासत-आधारित विकास को भी नई गति दे सकता है।

रतनगढ़ किला क्यों है खास

रतनगढ़ किले का निर्माण 1733 में राजा संपत पाल ने कराया था। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, यह भद्रवाह घाटी में कभी मौजूद रहे सात मूल बुर्जों में से आज बचा एकमात्र किला है। समय के साथ इस संरचना का उपयोग जेल के रूप में भी किया गया। इसकी बनावट और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे जम्मू-कश्मीर की विरासत सूची में एक महत्वपूर्ण स्थान देती है।

संरक्षण के साथ पर्यटन विकास की योजना

स्वीकृत परियोजना का उद्देश्य केवल किले की मरम्मत करना नहीं है, बल्कि उसकी वास्तुशिल्पीय मूल पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे एक विरासत और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना भी है। चेनाब घाटी जैसे क्षेत्र में, जहां प्राकृतिक सुंदरता के साथ ऐतिहासिक स्थल भी मौजूद हैं, ऐसे प्रयास स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकते हैं।

भद्रवाह, डोडा जिले का एक प्रमुख कस्बा है और चेनाब घाटी क्षेत्र का हिस्सा है। यह इलाका पहाड़ी भू-आकृति, नदी घाटियों और सांस्कृतिक-ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता है। ऐसे में रतनगढ़ किले का पुनर्स्थापन क्षेत्र की पहचान को और मजबूत कर सकता है।

जम्मू-कश्मीर में विरासत संरक्षण का व्यापक संदर्भ

जम्मू-कश्मीर में किले, मंदिर, दरगाहें और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं लंबे समय से संरक्षण के दायरे में रही हैं। इन स्थलों का महत्व केवल स्थापत्य या पुरातात्विक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक स्मृति और पर्यटन संभावनाओं के लिहाज से भी है। रतनगढ़ किले का पुनरुद्धार इसी व्यापक विरासत संरक्षण प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रतनगढ़ किले का निर्माण 1733 में राजा संपत पाल ने कराया था।
  • यह किला जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भद्रवाह में स्थित है।
  • चेनाब घाटी में डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिले शामिल हैं।
  • परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

रतनगढ़ किले का संरक्षण भद्रवाह की ऐतिहासिक पहचान को सहेजने के साथ-साथ चेनाब घाटी को पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Originally written on August 11, 2026 and last modified on August 11, 2026.

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