परादीप पोर्ट को नई रफ्तार, 427.80 करोड़ की परियोजनाओं से बढ़ी क्षमता

परादीप पोर्ट को नई रफ्तार, 427.80 करोड़ की परियोजनाओं से बढ़ी क्षमता

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 21 अगस्त 2026 को ओडिशा के परादीप पोर्ट अथॉरिटी में 427.80 करोड़ रुपये की सात आधारभूत परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में कैपिटल ड्रेजिंग, एक नया पुल, वेसल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और पोर्ट की कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने से जुड़ी यांत्रिकीकरण पहलें शामिल हैं।

परादीप पोर्ट की रणनीतिक भूमिका

परादीप पोर्ट भारत के पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाहों में गिना जाता है और यह खनिज, ऊर्जा तथा उर्वरक से जुड़े भारी माल के आवागमन के लिए अहम केंद्र है। यहां कंटेनर और बल्क कार्गो दोनों का संचालन होता है, इसलिए इसकी गहराई, ट्रैफिक प्रबंधन और टर्मिनल क्षमता सीधे व्यापार दक्षता से जुड़ी रहती है।

इस मौके पर शुरू की गई परियोजनाओं का उद्देश्य बंदरगाह को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और तेज बनाना है, ताकि जहाजों का ठहराव समय घटे और माल ढुलाई की गति बढ़े।

गहरी ड्राफ्ट सुविधा से बड़े जहाजों को लाभ

सबसे बड़ी परियोजना 352 करोड़ रुपये की कैपिटल ड्रेजिंग है, जिसके जरिए 18.5 मीटर गहरी ड्राफ्ट सुविधा तैयार की गई है। इससे परादीप पोर्ट पूरी तरह लदे हुए कैपसाइज़ जहाजों को संभालने में सक्षम होगा।

कैपसाइज़ बड़े बल्क कैरियर होते हैं, जिनका उपयोग अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भारी मात्रा में माल ढोने के लिए किया जाता है। गहरी ड्राफ्ट सुविधा मिलने से बंदरगाह की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है और बड़े जहाजों के लिए वैकल्पिक बंदरगाहों पर निर्भरता कम हो सकती है।

पुल, ट्रैफिक सिस्टम और यांत्रिकीकरण से संचालन होगा तेज

24.89 करोड़ रुपये की अथरबांकी सेकंड न्यू ब्रिज परियोजना भी शुरू की गई। यह 500 मीटर लंबा तीन-लेन पुल है, जो प्रतिदिन लगभग 3,000 ट्रकों की आवाजाही को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इससे बंदरगाह क्षेत्र में सड़क संपर्क और माल ढुलाई की सुगमता बढ़ने की उम्मीद है।

इसके साथ ही आईआईटी मद्रास के नेशनल टेक्नोलॉजी सेंटर फॉर पोर्ट्स, वाटरवेज एंड कोस्ट्स के सहयोग से एक उन्नत वेसल ट्रैफिक मैनेजमेंट एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम भी शुरू किया गया। यह प्रणाली जहाजों की आवाजाही पर बेहतर निगरानी और समन्वय में मदद करेगी।

तीन यांत्रिकीकरण रियायत समझौते भी किए गए, जिनकी कुल लागत 1,580.36 करोड़ रुपये है। इनमें 5 एमटीपीए साउथ क्वे परियोजना, 8 एमटीपीए मल्टीपर्पज बर्थ परियोजना और 10 एमटीपीए कैप्टिव सीक्यू-III परियोजना शामिल हैं। इनसे पोर्ट की हैंडलिंग क्षमता और जहाजों का टर्नअराउंड टाइम बेहतर होने की संभावना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • परादीप पोर्ट ओडिशा में भारत के पूर्वी तट पर स्थित है और परादीप पोर्ट अथॉरिटी के अधीन कार्य करता है।
  • कैपसाइज़ जहाज बड़े बल्क कैरियर होते हैं, जिन्हें पूरी लोडिंग के लिए गहरे ड्राफ्ट वाले बंदरगाहों की जरूरत होती है।
  • एमटीपीए का अर्थ मिलियन टन प्रति वर्ष है, जिसका उपयोग कार्गो हैंडलिंग क्षमता मापने में होता है।
  • आईआईटी मद्रास का नेशनल टेक्नोलॉजी सेंटर फॉर पोर्ट्स, वाटरवेज एंड कोस्ट्स समुद्री प्रौद्योगिकी पर काम करता है।

परादीप पोर्ट ने पर्यावरणीय पहल के तहत अपनी एक करोड़वीं वृक्षारोपण उपलब्धि भी दर्ज की है। नई परियोजनाओं के साथ बंदरगाह ने 150 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक कार्गो क्षमता का महत्वपूर्ण पड़ाव भी हासिल किया है।

Originally written on August 22, 2026 and last modified on August 22, 2026.

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