मोबाइल फूड टेस्टिंग को मिली नई मान्यता, खाद्य सुरक्षा निगरानी होगी तेज

मोबाइल फूड टेस्टिंग को मिली नई मान्यता, खाद्य सुरक्षा निगरानी होगी तेज

भारत में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) ने मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब्स के लिए देश की पहली मान्यता योजना शुरू की है। यह पहल 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के होटल अशोक में आयोजित ‘गुणवत्ता समन्वय – बहुपक्षीय एमओयू विनिमय समारोह’ में पेश की गई।

मोबाइल लैब्स के लिए पहली औपचारिक मान्यता

नई योजना का उद्देश्य उन मोबाइल प्रयोगशालाओं की क्षमता को मान्यता देना है जो वाहन या परिवहन योग्य यूनिट पर आधारित होती हैं और नमूना संग्रह स्थल के पास ही परीक्षण कर सकती हैं। ऐसे मोबाइल सेटअप स्थानीय बाजारों, दूरदराज़ क्षेत्रों और त्वरित जांच की जरूरत वाले स्थानों पर खाद्य नमूनों की स्क्रीनिंग के लिए उपयोगी होते हैं।

इस ढांचे के तहत मान्यता का मतलब प्रयोगशाला की तकनीकी क्षमता, उपकरणों, परीक्षण विधियों और कर्मियों की योग्यता का मूल्यांकन है। हालांकि यह व्यवस्था मोबाइल लैब की भौतिक स्थापना के लिए वित्तीय सहायता नहीं देती।

खाद्य सुरक्षा निगरानी में क्या बदलेगा

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह ढांचा मोबाइल प्रयोगशालाओं को स्थानीय समुदायों तक सीधे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खाद्य परीक्षण सेवाएं पहुंचाने में सक्षम बनाएगा। इससे संदिग्ध नमूनों की जांच तेज होगी और यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या दूषित तत्व पाए जाते हैं, तो नियामकीय कार्रवाई भी जल्दी की जा सकेगी।

भारत जैसे बड़े और विविध देश में खाद्य आपूर्ति श्रृंखला लंबी है, इसलिए कई बार नमूनों को दूर स्थित प्रयोगशालाओं तक भेजने में समय लग जाता है। मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब्स इस अंतर को कम कर सकती हैं और फील्ड-लेवल निगरानी को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।

आईएपी और एमओयू ढांचे की भूमिका

यह योजना NABL के इंटीग्रेटेड असेसमेंट प्रोग्राम (IAP) के तहत लागू होगी। इस कार्यक्रम में कई मूल्यांकन आवश्यकताओं को एक ही प्रक्रिया में जोड़ा जाता है, जिससे दोहराव कम होता है और मान्यता प्रक्रिया अधिक सरल बनती है। यह व्यवस्था ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी समर्थन देती है।

कार्यक्रम के साथ जुड़े बहुपक्षीय एमओयू का उद्देश्य गुणवत्ता ढांचे को एकीकृत करना और नियामकीय समन्वय को बढ़ावा देना है। ऐसे समझौते संस्थागत सहयोग को औपचारिक रूप देते हैं और विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय को आसान बनाते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • NABL का पूरा नाम National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories है।
  • QCI यानी Quality Council of India की स्थापना 1997 में एक स्वायत्त संस्था के रूप में की गई थी।
  • मान्यता का अर्थ प्रयोगशाला की क्षमता का आकलन है, न कि उसके लिए वित्तीय सहायता देना।
  • मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब्स नमूना संग्रह स्थल के पास ही जांच कर सकती हैं, जिससे समय की बचत होती है।

यह पहल खाद्य परीक्षण को अधिक तेज, सुलभ और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर निगरानी मजबूत होगी और खाद्य सुरक्षा तंत्र को नई तकनीकी मजबूती मिलेगी।

Originally written on August 11, 2026 and last modified on August 11, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *