मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र का कोयंबटूर में उद्घाटन
मानव-वन्यजीव संघर्ष के वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान–सलीम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र परिसर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict) का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव तथा केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह उपस्थित रहे। यह केंद्र देशभर में मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान के लिए अनुसंधान, नीति निर्माण और आधुनिक तकनीक आधारित प्रबंधन का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र होगा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष क्या है?
मानव-वन्यजीव संघर्ष से आशय उन परिस्थितियों से है, जब मनुष्यों और जंगली जानवरों के बीच नकारात्मक संपर्क होता है। इसमें फसलों को नुकसान, पशुधन का शिकार, संपत्ति की क्षति तथा मानवों के घायल होने या मृत्यु जैसी घटनाएं शामिल हैं। भारत में ऐसे संघर्षों के प्रमुख उदाहरण हाथी, तेंदुआ, संरक्षित क्षेत्रों के बाहर विचरण करने वाले बाघ, जंगली सूअर तथा अन्य बड़े स्तनधारी जीवों से जुड़े होते हैं। बढ़ती आबादी, भूमि उपयोग में परिवर्तन और वन क्षेत्रों पर दबाव के कारण ऐसी घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है।
उत्कृष्टता केंद्र की भूमिका
यह उत्कृष्टता केंद्र मानव-वन्यजीव संघर्ष के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, नीति समर्थन, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार के लिए राष्ट्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर संघर्ष प्रबंधन की प्रभावी रणनीतियां विकसित करना है। इस केंद्र की स्थापना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 मार्च 2025 को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सातवीं बैठक के दौरान की थी। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक सलाहकार निकाय है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक का उपयोग
उद्घाटन समारोह के दौरान राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया गया। यह डिजिटल मंच संघर्ष से संबंधित आंकड़ों के प्रबंधन, ज्ञान साझा करने और निर्णय लेने में सहायता प्रदान करेगा। साथ ही “भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन” शीर्षक से पहली रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें देश में संघर्ष की वर्तमान स्थिति, रुझानों और प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। केंद्र संघर्ष प्रबंधन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उपग्रह मानचित्रण और पूर्वानुमान विश्लेषण (प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा।
राष्ट्रीय कार्यशाला और संरक्षण की दिशा
उद्घाटन के बाद मानव-वन्यजीव संघर्ष पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें नीति-निर्माताओं, वन अधिकारियों, वैज्ञानिकों और संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों के लिए प्रभावी शमन रणनीतियों पर चर्चा की गई। भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय समुदायों की आजीविका की सुरक्षा और परिदृश्य-आधारित संरक्षण योजना को भी समान महत्व दिया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) का मुख्यालय देहरादून, उत्तराखंड में स्थित है और यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- सलीम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र (एसएसीओएन) भारत का प्रमुख पक्षी विज्ञान और जैव विविधता अनुसंधान संस्थान है।
- राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड का गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किया गया है।
- भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष से सबसे अधिक जुड़े वन्यजीवों में हाथी, तेंदुआ और बाघ प्रमुख हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना भारत में वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और नीति आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से यह केंद्र संघर्ष की घटनाओं को कम करने, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करने और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।