महाराष्ट्र में खुला खाद्य तेल बेचने पर सख्ती
महाराष्ट्र सरकार ने खाद्य तेल की बिक्री और आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा कदम उठाते हुए खुले या बिना पैकिंग वाले खाने के तेल और वसा की बिक्री पर राज्यव्यापी रोक लगा दी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) का यह आदेश 20 अगस्त 2026 से लागू हुआ और इसका दायरा तेल निकालने वाली इकाइयों से लेकर रिफाइनर, ब्लेंडर, रीपैकर, आयातक, थोक विक्रेता, परिवहनकर्ता, खुदरा दुकानदार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक फैला है।
क्यों लिया गया यह फैसला
खाद्य तेल रोजमर्रा की जरूरत का उत्पाद है, इसलिए इसकी गुणवत्ता, शुद्धता और ट्रेसबिलिटी सीधे उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। खुले तेल में मिलावट, भंडारण की खराबी और स्रोत की पहचान न होने जैसी समस्याएं अधिक रहती हैं। इसी वजह से राज्य प्रशासन ने तय किया है कि अब तेल केवल सीलबंद और छेड़छाड़-रोधी पैकेट में ही बेचा जाएगा।
आदेश के अनुसार हर पैक पर पूरी लेबलिंग अनिवार्य होगी। इसमें उत्पाद की पहचान, स्रोत, बैच विवरण और एक्सपायरी जैसी जानकारी शामिल रहेगी। बहु-स्रोत वनस्पति तेल के पैक के लिए अधिकतम 15 किलोग्राम की सीमा भी तय की गई है।
खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत क्या-क्या बदला
भारत में खाद्य तेल का नियमन खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा उससे जुड़े नियमों के तहत होता है। इस कानून के तहत असुरक्षित, मानक से कम गुणवत्ता वाले या गलत लेबल वाले खाद्य उत्पादों पर कार्रवाई की जा सकती है। महाराष्ट्र का नया निर्देश इसी ढांचे को और सख्ती से लागू करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
आदेश में वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में तलने के तेल के बार-बार उपयोग पर भी रोक लगाई गई है। यदि प्रयुक्त तेल में टोटल पोलर कंपाउंड्स 25 प्रतिशत से अधिक हो जाएं, तो उसे अधिकृत संग्रहकर्ताओं के माध्यम से नष्ट करना होगा। टोटल पोलर कंपाउंड्स तेल की बार-बार गरमी से होने वाली खराबी का रासायनिक संकेतक होते हैं।
उल्लंघन पर सजा और जुर्माना
एफडीए ने स्पष्ट किया है कि नियम तोड़ने पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अभियोजन हो सकता है। गंभीर मामलों में सात साल तक की कैद का प्रावधान है। इसके अलावा असुरक्षित खाद्य या भ्रामक विज्ञापन पर 10 लाख रुपये तक, मानक से कम गुणवत्ता वाले तेल पर 5 लाख रुपये तक और गलत लेबलिंग वाले तेल पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
राज्य में पिछले एक वर्ष में 1,247 खाद्य तेल नमूनों की जांच की गई, जिनमें 77 नमूने मानक से कम, 13 असुरक्षित और 15 गलत लेबल वाले पाए गए। यह आंकड़े बताते हैं कि निगरानी की जरूरत केवल कागजी नहीं, बल्कि व्यावहारिक स्तर पर भी बनी हुई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 भारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा का मुख्य कानून है।
- टोटल पोलर कंपाउंड्स का उपयोग तलने वाले तेल की गुणवत्ता और उसके खराब होने की मात्रा मापने के लिए किया जाता है।
- अर्गेमोन तेल से होने वाला प्रदूषण भारत में एपिडेमिक ड्रॉप्सी नामक खाद्य विषाक्तता से जुड़ा रहा है।
- जंग लगे टिन के डिब्बों में रखे तेल में सीसा घुलने का खतरा हो सकता है, इसलिए पैकेजिंग की गुणवत्ता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
महाराष्ट्र का यह आदेश उपभोक्ता सुरक्षा, मिलावट पर रोक और खाद्य तेल की ट्रेसबिलिटी को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे राज्य में तेल की बिक्री व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होने की उम्मीद है।