जल जीवन मिशन 2.0 के लिए क्षमता निर्माण पर केंद्र की नई पहल

जल जीवन मिशन 2.0 के लिए क्षमता निर्माण पर केंद्र की नई पहल

जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत क्षमता निर्माण पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इस परामर्श का उद्देश्य ग्रामीण पेयजल व्यवस्था से जुड़े स्थानीय संस्थानों और कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण ढांचे को और मजबूत करना था, ताकि गांव स्तर पर जल आपूर्ति की योजना, संचालन और निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सके।

ग्रामीण जल प्रबंधन में स्थानीय संस्थाओं की भूमिका

कार्यशाला का शीर्षक था “Multi-Stakeholder Consultation on Capacity Building under Jal Jeevan Mission 2.0 for GPs, VWSCs and Sujalam Shakti Groups”। इसमें ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और अन्य स्थानीय समूहों की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। जल जीवन मिशन की कार्यप्रणाली इसी विकेंद्रीकृत ढांचे पर आधारित है, जिसमें गांव स्तर पर निर्णय लेने और व्यवस्था को चलाने की जिम्मेदारी स्थानीय संस्थाओं के साथ साझा की जाती है।

इस मॉडल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्रोत की स्थिरता, जल गुणवत्ता, रखरखाव और समुदाय की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।

प्रशिक्षण मॉड्यूल और फील्ड स्तर की जरूरतें

कार्यशाला में फील्ड स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए तैयार किए गए प्रशिक्षण मॉड्यूल की विषयवस्तु, शिक्षण पद्धति और जमीनी उपयोगिता की समीक्षा की गई। इन मॉड्यूलों में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण जल प्रबंधन से जुड़े अन्य हितधारकों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।

चर्चा के दौरान जिन प्रमुख प्रशिक्षण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई, उनमें स्रोत की स्थिरता, जल गुणवत्ता की निगरानी, संचालन एवं रखरखाव, वित्तीय प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी शामिल रहे। ये सभी विषय ग्रामीण WASH यानी जल, स्वच्छता और स्वच्छता व्यवहार से सीधे जुड़े हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय और आगे की दिशा

इस परामर्श में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ प्रशिक्षण संस्थानों, ग्रामीण WASH भागीदारों और अन्य क्षेत्रीय हितधारकों ने हिस्सा लिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि जल जीवन मिशन 2.0 के लिए केवल नीति बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे लागू करने वाले लोगों की क्षमता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।

बैठक का निष्कर्ष यह रहा कि प्रशिक्षण ढांचे को अंतिम रूप देकर उसे देशभर में लागू किया जाएगा। इससे उम्मीद है कि ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों का संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही भी मजबूत होगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जल जीवन मिशन की शुरुआत भारत सरकार ने 2019 में की थी।
  • ग्राम पंचायतें पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की सबसे बुनियादी इकाई हैं।
  • Village Water and Sanitation Committees (VWSCs) गांव स्तर पर पेयजल और स्वच्छता प्रबंधन से जुड़ी स्थानीय समितियां होती हैं।
  • O&M का अर्थ Operation and Maintenance है, जो किसी भी बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव के लिए इस्तेमाल होने वाला सामान्य शब्द है।

कुल मिलाकर यह कार्यशाला ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को केवल योजना-आधारित नहीं, बल्कि क्षमता-आधारित बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

Originally written on August 21, 2026 and last modified on August 21, 2026.

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