महाराष्ट्र ने लागू की संपीड़ित बायोगैस नीति 2026
महाराष्ट्र सरकार ने 22 अप्रैल 2026 को संपीड़ित बायोगैस नीति 2026 को मंजूरी दी, जिसे 5 मई 2026 को आधिकारिक रूप से जारी किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने इस नीति को स्वीकृति दी। सरकार ने इसके लिए वर्ष 2026-27 में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह नीति कचरा प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
संपीड़ित बायोगैस क्या है
संपीड़ित बायोगैस यानी सीबीजी एक नवीकरणीय ईंधन है, जिसे जैविक कचरे से अवायवीय अपघटन और शुद्धिकरण प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है। महाराष्ट्र की नई नीति में शहरी ठोस कचरे और कृषि अवशेष दोनों को कच्चे माल के रूप में शामिल किया गया है। राज्य में प्रतिदिन लगभग 24,500 मीट्रिक टन नगर ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जबकि हर वर्ष 2 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक कृषि अवशेष पैदा होते हैं।
नीति की प्रमुख विशेषताएं
इस नीति का उद्देश्य महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में संपीड़ित बायोगैस परियोजनाएं स्थापित करना है। इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के माध्यम से परियोजनाओं को लागू किया जाएगा। नीति के तहत कचरे का स्रोत स्तर पर जैविक और अजैविक श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक सीबीजी परियोजना को प्रतिदिन कम से कम 200 टन पृथक जैविक कचरे का प्रसंस्करण करना होगा।
निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक संचालन समिति गठित की जाएगी। इसके अलावा जिला स्तर पर समन्वय समितियां भी बनाई जाएंगी। यदि कोई परियोजना दो वर्षों के भीतर चालू नहीं होती, तो उसके लिए आवंटित भूमि को रद्द कर दिया जाएगा। इससे समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन
सरकार ने परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि यानी वायबिलिटी गैप फंडिंग का प्रावधान किया है। इसके तहत प्रति टन क्षमता पर अधिकतम 75 लाख रुपये तक सहायता दी जाएगी, जबकि प्रति परियोजना अधिकतम सीमा 15 करोड़ रुपये तय की गई है। इसके अलावा बायोगैस इकाइयों को प्राथमिकता के आधार पर बिजली और पानी की आपूर्ति दी जाएगी। उत्पादन शुरू होने के बाद राज्य वस्तु एवं सेवा कर में 2.5 प्रतिशत तक की वापसी भी की जाएगी।
राष्ट्रीय योजनाओं से जुड़ाव
महाराष्ट्र की यह नीति सैटैट, गोबरधन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से जुड़ी हुई है। इन योजनाओं का उद्देश्य कचरे से ऊर्जा उत्पादन, स्वच्छता और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। यह नीति भारत के वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य से भी जुड़ी मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संपीड़ित बायोगैस शुद्धीकृत बायोगैस का रूप है जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है।
- वायबिलिटी गैप फंडिंग आधारभूत परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रणाली है।
- पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर परियोजना संचालित करते हैं।
- कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महाराष्ट्र की संपीड़ित बायोगैस नीति 2026 को स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे राज्य में हरित ऊर्जा उत्पादन और सतत विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।