मलयालम कवि और शिक्षाविद ए.सी. श्रीहरि का निधन
मलयालम साहित्य जगत को एक बड़ी क्षति पहुंचाते हुए प्रसिद्ध कवि और शिक्षाविद A.C. Sreehari का 56 वर्ष की आयु में हृदयाघात के कारण निधन हो गया। वे केरल के साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र में एक सम्मानित व्यक्तित्व थे। हाल ही में 30 मई को उन्होंने पय्यानूर कॉलेज से सेवानिवृत्ति ली थी, जहां वे अंग्रेजी विभाग के प्रमुख के रूप में कार्यरत रहे थे।
मलयालम साहित्य में योगदान
ए.सी. श्रीहरि मलयालम कविता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षरों में गिने जाते थे। उनकी रचनाएं केरल के विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रमों में शामिल थीं। उनकी कविताओं ने साहित्यिक जगत के साथ-साथ अकादमिक क्षेत्र में भी विशेष पहचान बनाई। उनकी लेखनी सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय विषयों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती थी। इसी कारण उनकी रचनाएं छात्रों और साहित्य प्रेमियों के बीच लोकप्रिय रहीं।
प्रमुख साहित्यिक कृतियां
उनकी उल्लेखनीय कृतियों में युवा कविताक्कूट्टम (1999) और कवितायुदे नूट्टांडु (2001) विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन पुस्तकों ने उन्हें मलयालम साहित्य में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनकी साहित्यिक रचनाओं में समकालीन समाज, मानवीय अनुभव और सांस्कृतिक विमर्श के विविध आयाम देखने को मिलते हैं, जो उन्हें आधुनिक मलयालम कविता के महत्वपूर्ण रचनाकारों में शामिल करते हैं।
शैक्षणिक उपलब्धियां
ए.सी. श्रीहरि केवल कवि ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद भी थे। उन्होंने Kannur University से वर्ष 2015 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी। उनका शोध विषय “कंस्ट्रक्शन ऑफ मैस्कुलिनिटी इन पॉपुलर मलयालम सिनेमा” था, जिसमें उन्होंने लोकप्रिय मलयालम फिल्मों में पुरुषत्व की अवधारणा का अकादमिक विश्लेषण किया। यह शोध साहित्य, संस्कृति और सिनेमा अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है।
साहित्यिक सम्मान
अपने साहित्यिक योगदान के लिए ए.सी. श्रीहरि को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उन्हें एन.एन. कक्कड़ पुरस्कार, वी.टी. कुमारन पुरस्कार और वायलोप्पिल्ली पुरस्कार प्राप्त हुए थे। ये सम्मान मलयालम साहित्य में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लेखकों और कवियों को प्रदान किए जाते हैं तथा साहित्यिक क्षेत्र में अत्यंत प्रतिष्ठित माने जाते हैं।
व्यक्तिगत जीवन
अपने पीछे ए.सी. श्रीहरि अपनी पत्नी संगीता के. और पुत्र ए.सी. श्रीहर्षन को छोड़ गए हैं। उनके निधन से साहित्यिक और शैक्षणिक समुदाय में शोक की लहर है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पय्यानूर कॉलेज केरल का एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है, जहां ए.सी. श्रीहरि ने अध्यापन कार्य किया।
- कन्नूर विश्वविद्यालय केरल का एक राज्य विश्वविद्यालय है।
- एन.एन. कक्कड़ पुरस्कार, वी.टी. कुमारन पुरस्कार और वायलोप्पिल्ली पुरस्कार मलयालम साहित्य के प्रतिष्ठित सम्मान हैं।
- मलयालम एक द्रविड़ भाषा है और भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में शामिल है।
ए.सी. श्रीहरि का निधन मलयालम साहित्य और शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी कविताएं, शोध कार्य और शिक्षण योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे और मलयालम साहित्य में उनकी विरासत लंबे समय तक याद की जाएगी।