बनवारीलाल पुरोहित बने भारतीय विद्या भवन के अध्यक्ष
बनवारीलाल पुरोहित को 7 जून 2026 को भारतीय विद्या भवन का अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुना गया। इसी दिन दीपक पारेख को संस्था का उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया। यह चुनाव भारतीय विद्या भवन की कार्यकारी समिति और न्यासी मंडल की संयुक्त बैठक में हुआ।
भारतीय विद्या भवन में नया नेतृत्व
भारतीय विद्या भवन के शासन ढांचे में अध्यक्ष का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अध्यक्ष संस्था की नीतिगत दिशा और प्रमुख निर्णयों में केंद्रीय भूमिका निभाता है। बनवारीलाल पुरोहित इससे पहले भी भारतीय विद्या भवन से जुड़े रहे हैं और उपाध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं। सुरेंद्रलाल मेहता ने स्वास्थ्य कारणों से अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद यह चुनाव कराया गया। चुनाव की घोषणा भारतीय विद्या भवन, मुंबई के कार्यकारी सचिव और महानिदेशक जगदीश लखानी ने की।
दीपक पारेख की उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति
दीपक पारेख को भारतीय विद्या भवन का उपाध्यक्ष चुना जाना संस्था के वरिष्ठ नेतृत्व को और मजबूत करता है। दीपक पारेख भारत के वित्तीय क्षेत्र के अनुभवी और प्रतिष्ठित नामों में गिने जाते हैं। उनके अनुभव से संस्था के प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
भारतीय विद्या भवन का महत्व
भारतीय विद्या भवन भारत की प्रमुख शैक्षिक और सांस्कृतिक संस्थाओं में से एक है। इसकी स्थापना 1938 में के. एम. मुंशी ने मुंबई में की थी। संस्था भारत और विदेशों में स्कूलों, कॉलेजों और सांस्कृतिक केंद्रों का संचालन करती है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, शिक्षा और मूल्यों को आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ाना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” भारतीय विद्या भवन की स्थापना 1938 में के. एम. मुंशी ने की थी। ” संस्था का मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है। ” बनवारीलाल पुरोहित पूर्व में भारतीय विद्या भवन के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। ” दीपक पारेख भारत के वित्तीय क्षेत्र के वरिष्ठ और अनुभवी व्यक्तित्व माने जाते हैं। बनवारीलाल पुरोहित का अध्यक्ष चुना जाना भारतीय विद्या भवन के लिए एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव है। नए नेतृत्व से संस्था की शैक्षिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को और गति मिलने की संभावना है।