भारत-मॉरीशस ऊर्जा साझेदारी को नई मजबूती
भारत और मॉरीशस ने तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग के लिए एक सरकारी-से-सरकारी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 20 अगस्त 2026 को पोर्ट लुईस में हुआ, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को औपचारिक और दीर्घकालिक आधार मिला है।
पोर्ट लुईस में हुआ अहम समझौता
इस MoU पर भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मॉरीशस के वाणिज्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री जॉन माइकल त्ज़ौन साओ येउंग सिक येन ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब मॉरीशस अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर काफी हद तक निर्भर है।
सरकारी-से-सरकारी यानी G2G व्यवस्था का अर्थ है कि दो संप्रभु देश किसी विशेष क्षेत्र में सहयोग के लिए औपचारिक सहमति बनाते हैं। इस मामले में फोकस तेल और गैस आपूर्ति, ऊर्जा स्थिरता और आपसी रणनीतिक साझेदारी पर है।
भारतीय कंपनियों की भूमिका और आपूर्ति व्यवस्था
MoU के साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के बीच पांच साल का बिक्री एवं खरीद समझौता भी हुआ है। इसके तहत पेट्रोल, डीजल, मरीन गैस ऑयल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल की आपूर्ति की जाएगी।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी है, जबकि स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ मॉरीशस वहां की सरकारी व्यापारिक इकाई है, जो आयात और वाणिज्यिक आपूर्ति व्यवस्था संभालती है। यह व्यवस्था केवल व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक संरचित कदम है।
ऊर्जा सुरक्षा और हिंद महासागर का महत्व
पोर्ट लुईस में हरदीप सिंह पुरी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ ऊर्जा लचीलापन और द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों पर भी चर्चा की। ऊर्जा लचीलापन का मतलब है अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाधा आने पर भी देश की ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की क्षमता।
यह पहल 9 अप्रैल 2026 को पोर्ट लुईस में आयोजित 9वें इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में एस. जयशंकर की घोषणा के बाद आगे बढ़ी। हिंद महासागर क्षेत्र भारत और मॉरीशस दोनों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यही समुद्री व्यापार, ईंधन परिवहन और क्षेत्रीय संपर्क का प्रमुख मार्ग है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पोर्ट लुईस मॉरीशस की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है।
- G2G समझौता दो देशों के बीच सरकारी स्तर पर सहयोग का औपचारिक दस्तावेज होता है।
- पेट्रोल, डीजल, मरीन गैस ऑयल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद हैं।
- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों में शामिल है।
इस समझौते से भारत-मॉरीशस संबंधों में ऊर्जा आयाम और मजबूत हुआ है। साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और वाणिज्यिक उपस्थिति को भी नई गति मिली है।