भारत में बिचैट ऐप पर कार्रवाई से बढ़ी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग पर बहस

भारत में बिचैट ऐप पर कार्रवाई से बढ़ी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग पर बहस

भारत सरकार के साइबर अपराध समन्वय केंद्र I4C ने ब्लूटूथ-आधारित चैट ऐप Bitchat को GitHub से हटाने का निर्देश दिया है। यह कदम 23 जुलाई 2026 को उठाया गया और 24 जुलाई 2026 को ऐप के डेवलपर तथा ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी ने इसे सार्वजनिक किया। यह मामला एन्क्रिप्टेड, विकेंद्रीकृत और बिना इंटरनेट चलने वाले संचार माध्यमों की सुरक्षा तथा नियमन को लेकर नई बहस खड़ी करता है।

बिचैट क्या है और यह कैसे काम करता है

Bitchat एक ओपन-सोर्स, पीयर-टू-पीयर मैसेजिंग ऐप है, जो Bluetooth Low Energy आधारित मेश नेटवर्क का उपयोग करता है। इसका मतलब है कि यह आसपास मौजूद डिवाइसों के बीच सीधे संदेश भेज सकता है और इसके लिए इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, फोन नंबर, यूजर रजिस्ट्रेशन या केंद्रीय सर्वर की जरूरत नहीं होती। आम तौर पर इसकी कार्य-सीमा 30 से 100 मीटर के बीच बताई जाती है।ऐसे ऐप उन परिस्थितियों में उपयोगी माने जाते हैं, जहां इंटरनेट बाधित हो या स्थानीय स्तर पर डिवाइस-टू-डिवाइस संचार की जरूरत हो। लेकिन यही विशेषताएं इन्हें निगरानी और जांच के लिहाज से चुनौतीपूर्ण भी बनाती हैं।

कानूनी आधार और सरकार की आपत्ति

सरकारी निर्देश में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) और आईटी नियम, 2021 के नियम 3(1)(d) का हवाला दिया गया। आदेश में GitHub से Bitchat के तीन रिपॉजिटरी, जिनमें एंड्रॉयड संस्करण भी शामिल था, कुछ ही घंटों में बंद करने को कहा गया।धारा 79 भारत में इंटरमीडियरी दायित्व से जुड़ी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जबकि नियम 3(1)(d) इंटरमीडियरी की उचित सावधानी और सामग्री अनुपालन से संबंधित है। सरकार का तर्क है कि Bitchat जैसी संरचना में संचार का स्रोत और उपयोगकर्ता की पहचान आसानी से नहीं पकड़ी जा सकती, जिससे वैध इंटरसेप्शन, जांच और जिम्मेदारी तय करना कठिन हो जाता है।

सुरक्षा चिंताएं और व्यापक असर

आदेश में आशंका जताई गई कि ऐसे विकेंद्रीकृत और गुमनाम ऐप का दुरुपयोग राष्ट्र-विरोधी तत्व, आतंकी संगठन, संगठित अपराध समूह और साइबर अपराधी कर सकते हैं। इंटरनेट प्रतिबंधों के दौरान भी ऐसे ऐप काम कर सकते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल समन्वय, भ्रामक सूचना फैलाने और अवैध संचार के लिए किया जा सकता है।यह मामला केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि इस सवाल से जुड़ा है कि मजबूत एन्क्रिप्शन, गोपनीयता और कानून-प्रवर्तन की जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म GitHub पर उपलब्ध ऐसे प्रोजेक्ट्स पर कार्रवाई का असर डेवलपर समुदाय और डिजिटल सुरक्षा नीतियों पर भी पड़ सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • I4C गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला एक विशेष साइबर अपराध समन्वय केंद्र है।
  • GitHub माइक्रोसॉफ्ट की सहायक कंपनी है और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के लिए प्रमुख मंच माना जाता है।
  • Bluetooth Low Energy कम ऊर्जा खपत वाला शॉर्ट-रेंज वायरलेस संचार मानक है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 भारत में इंटरमीडियरी दायित्व से जुड़ी प्रमुख धारा है।

बिचैट पर कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकार एन्क्रिप्टेड और विकेंद्रीकृत संचार ऐप्स को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना रही है। आने वाले समय में ऐसे प्लेटफॉर्मों की तकनीकी संरचना और कानूनी जवाबदेही पर बहस और तेज हो सकती है।

Originally written on July 25, 2026 and last modified on July 25, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *