भारत में बनेंगे अत्याधुनिक लोटरिंग म्यूनिशन और आईएसटीएआर ड्रोन
भारतीय रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी एसएमपीपी (SMPP) और यूरोप की प्रमुख भूमि रक्षा कंपनी केएनडीएस (KNDS) ने 20 जून 2026 को पेरिस में आयोजित यूरोसैटरी प्रदर्शनी के दौरान एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत भारत में लोटरिंग म्यूनिशन और आईएसटीएआर (ISTAR) ड्रोन का स्थानीय स्तर पर निर्माण किया जाएगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया कार्यक्रमों को मजबूती देने के साथ-साथ भारतीय सशस्त्र बलों की आधुनिक युद्धक क्षमताओं को भी सुदृढ़ करेगी।
लोटरिंग म्यूनिशन क्या हैं?
लोटरिंग म्यूनिशन ऐसे मानव रहित हवाई हथियार होते हैं जो लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक मंडरा सकते हैं और उपयुक्त लक्ष्य की पहचान होने पर उस पर हमला कर सकते हैं। इन्हें सैन्य भाषा में “सर्च एंड डिस्ट्रॉय” प्रणाली भी कहा जाता है। ये प्रणालियां निगरानी, लक्ष्य पहचान और सटीक हमला करने की क्षमता को एक ही प्लेटफॉर्म में एकीकृत करती हैं। पारंपरिक तोपखाने के गोले या मिसाइलों के विपरीत, लोटरिंग म्यूनिशन लक्ष्य की खोज करने के बाद हमला करते हैं, जिससे उनकी प्रभावशीलता और सटीकता बढ़ जाती है।
समझौते में कौन-कौन सी प्रणालियां शामिल हैं?
इस साझेदारी के तहत केएनडीएस की VELOCE और RODEUR लोटरिंग म्यूनिशन प्रणालियों तथा आईएसटीएआर ड्रोन परिवार का भारत में निर्माण किया जाएगा। इन प्रणालियों में उन्नत हाइब्रिड मार्गदर्शन तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें मल्टी-कॉन्स्टेलेशन जीएनएसएस (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) को एकीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त इनमें “फायर एंड फॉरगेट” क्षमता भी मौजूद है, जिससे हथियार को लॉन्च करने के बाद निरंतर नियंत्रण की आवश्यकता नहीं होती।
भारतीय सेना को कैसे मिलेगा लाभ?
भारतीय सेना आधुनिक युद्धक्षेत्र के लिए सटीक प्रहार (Precision Strike) प्रणालियों की आवश्यकता पर लगातार जोर दे रही है। लोटरिंग म्यूनिशन और आईएसटीएआर ड्रोन दुश्मन के महत्वपूर्ण लक्ष्यों की पहचान और उन पर त्वरित एवं सटीक हमला करने में सक्षम हैं। इन प्रणालियों के स्वदेशी निर्माण से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि भारतीय सेना को आवश्यक उपकरण समय पर उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी। साथ ही देश में उन्नत रक्षा तकनीक के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
रक्षा क्षेत्र में बढ़ता स्वदेशीकरण
भारत हाल के वर्षों में ड्रोन, मिसाइल, तोपखाना प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन पर विशेष ध्यान दे रहा है। यह नया समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पहले नवंबर 2025 में एसएमपीपी और केएनडीएस ने KATANA 155 मिमी प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी म्यूनिशन के लिए भी साझेदारी की थी। एसएमपीपी भारतीय सेना को 106 अग्निवेग लोटरिंग म्यूनिशन प्रणालियां भी उपलब्ध करा चुकी है, जिनकी परिचालन सीमा लगभग 180 किलोमीटर है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूरोसैटरी पेरिस, फ्रांस में आयोजित होने वाली विश्व की प्रमुख रक्षा और सुरक्षा प्रदर्शनी है।
- जीएनएसएस (GNSS) का अर्थ ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है, जिसमें विभिन्न उपग्रह नेविगेशन प्रणालियां शामिल होती हैं।
- इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) का उपयोग मिसाइलों, विमानों और मानव रहित प्रणालियों में दिशा-निर्देशन के लिए किया जाता है।
- लोटरिंग म्यूनिशन पारंपरिक तोपखाने के गोलों से अलग होते हैं क्योंकि वे लक्ष्य खोजने के बाद हमला करने में सक्षम होते हैं।
एसएमपीपी और केएनडीएस के बीच यह रणनीतिक साझेदारी भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई गति देने वाली पहल है। लोटरिंग म्यूनिशन और आईएसटीएआर ड्रोन जैसी उन्नत प्रणालियों का देश में निर्माण भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करेगा और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने में योगदान देगा।