भारत में अंग प्रत्यारोपण ने पहली बार 20 हजार का आंकड़ा पार किया
भारत ने 2025 में 20,138 अंग प्रत्यारोपण दर्ज किए, और यह पहली बार था जब सालाना आंकड़ा 20 हजार के पार गया। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के संकलित आंकड़ों के अनुसार यह उपलब्धि भारत में प्रत्यारोपण सेवाओं के विस्तार, जागरूकता और दान प्रणाली के मजबूत होने का संकेत देती है। 2024 में यह संख्या 18,911 थी, जबकि 2013 में केवल 4,990 प्रत्यारोपण दर्ज किए गए थे।
भारत में प्रत्यारोपण का बढ़ता दायरा
अंग प्रत्यारोपण एक शल्य प्रक्रिया है, जिसमें एक व्यक्ति के शरीर से अंग निकालकर दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। भारत में किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत जैसे अंगों का प्रत्यारोपण किया जाता है। इनमें किडनी और आंशिक लिवर प्रत्यारोपण सबसे अधिक सामान्य हैं, खासकर जीवित दाताओं के माध्यम से। जीवित दाता प्रत्यारोपण में किसी जीवित व्यक्ति से पूरा अंग या उसका हिस्सा लिया जाता है, जबकि मृतक दाता प्रत्यारोपण में ब्रेन स्टेम डेथ या परिसंचरण रुकने के बाद कानूनी और चिकित्सकीय प्रमाणन के आधार पर अंग लिए जाते हैं। 2025 में भारत में 3,526 मृतक दाता प्रत्यारोपण दर्ज किए गए, जो 2013 के 837 की तुलना में काफी अधिक हैं।
राज्यों की भूमिका और मृतक दान की स्थिति
क्षेत्रीय स्तर पर दिल्ली-एनसीआर 2025 में 4,564 प्रत्यारोपण के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद तमिलनाडु में 2,796, महाराष्ट्र में 2,136, तेलंगाना में 1,523 और केरल में 1,489 प्रत्यारोपण दर्ज किए गए। यह वितरण बताता है कि कुछ राज्यों में अस्पतालों, विशेषज्ञ टीमों और समन्वय व्यवस्था की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर रही है। मृतक अंगदान के मामले में तमिलनाडु 266 दाताओं के साथ सबसे आगे रहा। महाराष्ट्र में 205, तेलंगाना में 198, कर्नाटक में 154 और केरल में 152 मृतक दाता दर्ज किए गए। भारत में अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, इसलिए मृतक दान को बढ़ाना नीति-स्तर पर लगातार प्राथमिकता में है।
नीति, डिजिटल पहल और परीक्षा के लिए जरूरी तथ्य
NOTTO, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करता है और देश में अंगदान तथा प्रत्यारोपण गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी निभाता है। 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेज पोर्टल पर अब तक पांच लाख से अधिक आधार-प्रमाणित अंगदान संकल्प दर्ज हो चुके हैं। अगस्त 2026 में अंगदान जागरूकता के लिए जुग जुग जियो अभियान, प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं के लिए ई-प्रत्यारोपण डिजिटल मंच, और NOTTO मोबाइल ऐप शुरू किए गए। इसी दौरान नए राष्ट्रीय ब्रेन स्टेम डेथ प्रमाणन दिशानिर्देश और स्वैप ट्रांसप्लांटेशन से जुड़े राष्ट्रीय दिशानिर्देश भी जारी किए गए। भारत 2025 में कुल अंग प्रत्यारोपण के मामले में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर रहा, जबकि जीवित दाता अंग प्रत्यारोपण में वह 2026 तक वैश्विक स्तर पर पहले स्थान पर बना रहा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- NOTTO का पूरा नाम National Organ and Tissue Transplant Organisation है।
- भारत ने 2025 में पहली बार एक साल में 20,000 से अधिक अंग प्रत्यारोपण दर्ज किए।
- स्वैप ट्रांसप्लांटेशन में दो दाता-प्राप्तकर्ता जोड़े आपस में अंगों का आदान-प्रदान करते हैं, ताकि अनुकूलता बढ़ सके।
- भारत में मृतक अंगदान के लिए ब्रेन स्टेम डेथ का कानूनी और चिकित्सकीय प्रमाणन आवश्यक होता है।
यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत में प्रत्यारोपण चिकित्सा का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक चुनौती अब भी अंगदान की कमी को कम करना और अधिक लोगों तक समय पर उपचार पहुंचाना है।