भारत में अंगदान प्रतिज्ञाओं का आंकड़ा पांच लाख के पार
भारत में 22 जून 2026 तक अंगदान के लिए पांच लाख से अधिक लोगों ने स्वैच्छिक प्रतिज्ञा दर्ज कराई है। यह उपलब्धि देश में अंगदान के प्रति बढ़ती जागरूकता और नागरिक भागीदारी को दर्शाती है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस आंकड़े को अंग और ऊतक दान के लिए बढ़ते ऑनलाइन पंजीकरण और जन-जागरूकता अभियानों का परिणाम बताया है। अंगदान न केवल गंभीर रोगियों को नया जीवन प्रदान करता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता को भी मजबूत बनाता है।
भारत में अंगदान की कानूनी व्यवस्था
भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज एक्ट, 1994 के तहत संचालित किया जाता है। यह कानून अंगों को निकालने, सुरक्षित रखने और प्रत्यारोपित करने की कानूनी रूपरेखा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत जीवित दान और मृतक दान दोनों प्रकार की व्यवस्थाएं शामिल हैं। यह अधिनियम केवल अंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉर्निया, त्वचा और हड्डियों जैसे ऊतकों के दान को भी मान्यता देता है। इसका उद्देश्य अंगों के अवैध व्यापार को रोकना और पारदर्शी प्रत्यारोपण प्रणाली सुनिश्चित करना है।
NOTTO की भूमिका और डिजिटल पहल
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) भारत में अंगदान गतिविधियों के समन्वय के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख संस्था है। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और देशभर में अंगदान तथा प्रत्यारोपण से संबंधित डेटा, प्रतीक्षा सूची और समन्वय व्यवस्था का संचालन करती है। वर्ष 2023 में NOTTO ने आधार-आधारित ऑनलाइन प्रतिज्ञा पोर्टल शुरू किया, जिससे नागरिक घर बैठे अंगदान के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रक्रिया अधिक सरल और सुलभ हुई है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में अंगदान के महत्व पर बल देकर लोगों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
प्रत्यारोपण के आंकड़े और चुनौतियां
मार्च 2026 तक भारत की राष्ट्रीय प्रतीक्षा सूची में लगभग 90,000 मरीज शामिल थे, जिन्हें जीवनरक्षक अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता है। हालांकि अंगदान की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, फिर भी मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। देश में वर्ष 2025 के दौरान लगभग 20,000 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जबकि 2013 में यह संख्या 5,000 से भी कम थी। मृतक दाताओं से होने वाले प्रत्यारोपण कुल प्रत्यारोपणों का लगभग 18 प्रतिशत रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि मृतक अंगदान को बढ़ावा देकर प्रतीक्षा सूची में शामिल हजारों मरीजों को राहत दी जा सकती है।
जन-जागरूकता अभियान और राज्यों की भागीदारी
महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों ने अंगदान पंजीकरण में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी अभियान भी चलाए जा रहे हैं। “डोनेट ऑर्गन्स, सेव लाइव्स” अभियान इसका एक प्रमुख उदाहरण है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सहयोग से चलाए गए इस अभियान के दौरान 12 फरवरी 2025 को अहमदाबाद में भारत-इंग्लैंड एकदिवसीय मैच के अवसर पर एक ही दिन में 22,000 से अधिक लोगों ने अंगदान की प्रतिज्ञा ली थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में हर वर्ष 13 अगस्त को राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया जाता है।
- NOTTO देश में अंग और ऊतक दान के समन्वय के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख संस्था है।
- ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज एक्ट, 1994 भारत में अंग प्रत्यारोपण से संबंधित मुख्य कानून है।
- अंगदान के दो प्रमुख प्रकार हैं—जीवित दान (Living Donation) और मृतक दान (Deceased Donation)।
अंगदान मानवता की सेवा का एक ऐसा कार्य है जो किसी व्यक्ति के निधन के बाद भी कई लोगों को नया जीवन दे सकता है। पांच लाख से अधिक प्रतिज्ञाओं का आंकड़ा यह दर्शाता है कि भारत में इस विषय के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। यदि अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आते हैं, तो हजारों मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।