भारत बना एशिया-प्रशांत क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा डेटा सेंटर बाजार
भारत ने डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 27 मई 2026 तक एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में परिचालन डेटा सेंटर क्षमता के मामले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। देश की कुल लाइव डेटा सेंटर क्षमता 1.6 गीगावाट दर्ज की गई है। इसके साथ ही भारत विकासाधीन डेटा सेंटर परियोजनाओं के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन बाजारों में भी शामिल हो गया है, जहाँ 3.1 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन और योजनाबद्ध अवस्था में है। डेटा सेंटर की बढ़ती मांग भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था, क्लाउड सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े स्तर पर इंटरनेट उपयोग के विस्तार को दर्शाती है। यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।
भारत में डेटा सेंटर क्षमता और प्रमुख केंद्र
डेटा सेंटर क्षमता को गीगावाट (GW) में मापा जाता है, जहाँ 1 गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट होता है। भारत की 1.6 GW परिचालन क्षमता उसे एपीएसी क्षेत्र के सबसे बड़े बाजार के बाद दूसरा स्थान दिलाती है। मुंबई भारत का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनकर उभरा है और अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंत तक इसकी परिचालन क्षमता 1 GW से अधिक हो जाएगी। इसके अलावा हैदराबाद, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और पुणे भी तेजी से उभरते हुए द्वितीयक डेटा सेंटर बाजार हैं। हैदराबाद को एपीएसी क्षेत्र का शीर्ष द्वितीयक डेटा सेंटर बाजार और वैश्विक स्तर पर नौवां स्थान प्राप्त हुआ है। इन शहरों में बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, कॉर्पोरेट मांग और बड़े उपभोक्ता आधार के कारण निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
नीति और बुनियादी ढाँचा
भारत सरकार के ड्राफ्ट नेशनल डेटा सेंटर पॉलिसी 2025 में डेटा सेंटर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रस्ताव दिए गए हैं। इसमें 20 वर्षों तक कर छूट और पूंजीगत व्यय पर जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। 27 मई 2026 तक भारत में 10.5 GW से अधिक क्षमता भूमि अधिग्रहण चरण में थी, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र के तेज विस्तार का संकेत देती है। इसके साथ ही भारत ने 2022 से 2025 के बीच बिजली उत्पादन वृद्धि में वैश्विक स्तर पर चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि देश में ट्रांसमिशन लॉस 14.2% दर्ज किया गया, जिसे कम करने के प्रयास जारी हैं।
डेटा सेंटर विकास के प्रमुख कारण
भारत में डेटा सेंटर उद्योग की वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से बढ़ता उपयोग, हाइपरस्केल क्लाउड सेवाओं का विस्तार और विभिन्न कंपनियों की डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग इस क्षेत्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रही है। इसके अलावा भारत में डेटा सेंटर घनत्व लगभग 943,000 लोग प्रति मेगावाट आँका गया है, जो भविष्य में और अधिक डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता को दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की परिचालन डेटा सेंटर क्षमता 27 मई 2026 तक 1.6 गीगावाट थी।
- भारत में 3.1 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता निर्माणाधीन और योजनाबद्ध अवस्था में है।
- हैदराबाद एपीएसी का शीर्ष द्वितीयक डेटा सेंटर बाजार और वैश्विक स्तर पर नौवें स्थान पर रहा।
- 1 गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट होता है।
भारत का डेटा सेंटर क्षेत्र तेजी से वैश्विक निवेश और तकनीकी विकास का केंद्र बनता जा रहा है। सरकार की नीतिगत सहायता, मजबूत डिजिटल मांग और आधुनिक तकनीकों के विस्तार से यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।