भारत ने पेश किया पहला स्वदेशी एक्सिम-ग्रेड शिपिंग कंटेनर

भारत ने पेश किया पहला स्वदेशी एक्सिम-ग्रेड शिपिंग कंटेनर

भारत ने विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 3 जुलाई 2026 को अपना पहला एक्सिम-ग्रेड (निर्यात-आयात) शिपिंग कंटेनर प्रस्तुत किया। उत्तर प्रदेश के दादरी स्थित मैर्स्क-कॉनकोर इनलैंड कंटेनर डिपो में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस कंटेनर का अनावरण किया। इस कंटेनर का निर्माण डीसीएम श्रीराम समूह द्वारा किया गया है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।

एक्सिम-ग्रेड शिपिंग कंटेनर क्या है

एक्सिम का अर्थ एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट (निर्यात-आयात) है। एक्सिम-ग्रेड शिपिंग कंटेनर ऐसे मानकीकृत धातु के कंटेनर होते हैं जिनका उपयोग समुद्र, रेल और सड़क मार्ग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माल परिवहन के लिए किया जाता है। इन कंटेनरों को इस प्रकार डिजाइन किया जाता है कि इन्हें बिना माल निकाले विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच आसानी से स्थानांतरित किया जा सके। कंटेनर परिवहन में क्षमता मापने के लिए टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) का उपयोग किया जाता है, जो 20 फुट लंबे मानक कंटेनर के बराबर माप की इकाई है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्माण

भारत में निर्मित यह कंटेनर अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) के सभी आवश्यक मानकों का पालन करता है। इन मानकों में कंटेनर के आकार, मजबूती, हैंडलिंग और सुरक्षित स्टैकिंग से जुड़े नियम शामिल हैं। इसके अलावा यह कंटेनर इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर सेफ कंटेनर्स (सीएससी) के अनुरूप भी प्रमाणित है। यह अंतरराष्ट्रीय संधि वैश्विक स्तर पर कंटेनरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सुरक्षित माल परिवहन के लिए आवश्यक मानदंड निर्धारित करती है।

आत्मनिर्भर भारत और कंटेनर निर्माण को बढ़ावा

यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन योजना की घोषणा की थी। इस योजना का लक्ष्य भारत की वार्षिक कंटेनर निर्माण क्षमता को बढ़ाकर लगभग 7.5 लाख टीईयू तक पहुंचाना है। इससे घरेलू उद्योग, निर्यात क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

वैश्विक कंपनियों का बढ़ता भरोसा

इस परियोजना के तहत ए.पी. मोलर–मैर्स्क भारत में निर्मित एक्सिम-ग्रेड शिपिंग कंटेनर खरीदने वाली पहली अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनी बनी है। कंपनी ने डीसीएम श्रीराम समूह को 1,000 अतिरिक्त स्वदेशी कंटेनरों का ऑर्डर भी दिया है। यह भारतीय विनिर्माण क्षमता पर वैश्विक विश्वास का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इसके साथ ही भारत के इनलैंड कंटेनर डिपो और निजी औद्योगिक समूह देश के कंटेनर निर्माण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एक्सिम का पूरा अर्थ एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट (निर्यात-आयात) होता है।
  • टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) कंटेनर परिवहन में क्षमता मापने की मानक इकाई है।
  • इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर सेफ कंटेनर्स (सीएससी) वैश्विक स्तर पर कंटेनरों की सुरक्षा से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  • ए.पी. मोलर–मैर्स्क भारत में निर्मित एक्सिम-ग्रेड शिपिंग कंटेनर खरीदने वाली पहली अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनी बनी है।

भारत का पहला स्वदेशी एक्सिम-ग्रेड शिपिंग कंटेनर देश के विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे न केवल भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी मजबूत होगी, बल्कि घरेलू उद्योगों को भी नई संभावनाएं मिलेंगी। यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के साथ भारत को वैश्विक कंटेनर निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

Originally written on July 4, 2026 and last modified on July 4, 2026.

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