भारत-चीन व्यापार संबंधों में बढ़त, अमेरिका दूसरे स्थान पर खिसका
वित्त वर्ष 2025–26 में भारत के व्यापारिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला, जहां चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। यह परिवर्तन वैश्विक आर्थिक रुझानों में बदलाव और भारत की चीनी आयातों पर निरंतर निर्भरता को दर्शाता है, जबकि निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
चीन बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में भारत और चीन के बीच कुल व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही चीन ने एक बार फिर भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। इससे पहले भी चीन 2013–14 से 2017–18 और 2020–21 में इस स्थान पर रह चुका है। वहीं, अमेरिका, जो पिछले चार वर्षों से पहले स्थान पर था, अब दूसरे स्थान पर आ गया है।
बढ़ते आयात से व्यापार घाटा बढ़ा
चीन के साथ व्यापार में बढ़ोतरी का मुख्य कारण आयात में तेज वृद्धि है। भारत का चीन से आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात में 36.66 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 19.47 अरब डॉलर तक पहुंचा। इसके बावजूद व्यापार घाटा बढ़कर 112.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 99.2 अरब डॉलर था। यह स्थिति दर्शाती है कि भारत अभी भी इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कच्चे माल जैसे क्षेत्रों में चीन पर काफी हद तक निर्भर है।
भारत-अमेरिका व्यापार में संतुलन में बदलाव
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में मध्यम स्तर की वृद्धि देखी गई। भारत का अमेरिका को निर्यात 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके परिणामस्वरूप भारत का व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 40.89 अरब डॉलर था। यह दर्शाता है कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापारिक लाभ कुछ कम हुआ है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वित्त वर्ष 2025–26 में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना, जिसका कुल व्यापार 151.1 अरब डॉलर रहा।
- भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 112.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
- अमेरिका 2022 से 2025 तक भारत का शीर्ष व्यापारिक साझेदार रहा था।
- व्यापार घाटा तब होता है जब आयात, निर्यात से अधिक होता है।
भारत के अन्य व्यापारिक साझेदारों के साथ भी विविध रुझान देखने को मिले। यूएई, जर्मनी, ब्राजील और वियतनाम के साथ निर्यात में वृद्धि हुई, जबकि नीदरलैंड, यूके और बांग्लादेश के साथ गिरावट दर्ज की गई। आयात के मामले में सऊदी अरब, जापान और जर्मनी से वृद्धि हुई, जबकि रूस, इराक और इंडोनेशिया से आयात में कमी आई। यह संकेत देता है कि भारत का वैश्विक व्यापारिक ढांचा लगातार बदल रहा है और इसमें संतुलन बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।