भारत के लगभग हर आबाद गांव तक बैंकिंग पहुंच
भारत ने आबाद गांवों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने में लगभग सार्वभौमिक कवरेज हासिल कर लिया है। 3 अगस्त 2026 तक देश के 99.92% आबाद गांवों में 5 किलोमीटर के दायरे के भीतर बैंकिंग आउटलेट उपलब्ध था। यह उपलब्धि ग्रामीण वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि इससे गांवों में औपचारिक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच काफी व्यापक हुई है।
गांव-गांव तक पहुंचा बैंकिंग नेटवर्क
17 जुलाई 2026 तक भारत के 6,01,328 आबाद गांवों में से 6,00,868 गांवों को बैंक शाखा, बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट या इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक केंद्र के जरिए कवर किया जा चुका था। यह कवरेज जन धन दर्शक ऐप पर बैंकों द्वारा अपलोड किए गए डेटा के आधार पर दर्ज की गई।देश में बैंकिंग आउटलेट नेटवर्क अब काफी बड़ा हो चुका है। इसमें 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाएं, 17.36 लाख बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट और 1.65 लाख इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक केंद्र शामिल हैं। इस ढांचे ने दूर-दराज के इलाकों में भी न्यूनतम बैंकिंग पहुंच सुनिश्चित करने में मदद की है।
5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा का लक्ष्य
ग्रामीण बैंकिंग पहुंच के लिए नीति का मूल उद्देश्य यह है कि हर आबाद गांव के भीतर या उसके 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग आउटलेट उपलब्ध हो। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग प्रणाली को शाखाओं के साथ-साथ वैकल्पिक सेवा चैनलों के जरिए भी मजबूत किया गया है।भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों, छोटे वित्त बैंकों, पेमेंट्स बैंकों, लोकल एरिया बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को बिना पूर्व अनुमति के देश में कहीं भी शाखा खोलने की अनुमति देता है, हालांकि उन्हें बिना बैंकिंग सुविधा वाले ग्रामीण क्षेत्रों में 25% शाखाएं खोलने की शर्त का पालन करना होता है।
वित्तीय समावेशन की बड़ी तस्वीर
बैंकिंग पहुंच के साथ-साथ जन धन योजना ने भी वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। 17 जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत 58.77 करोड़ खाते खोले जा चुके थे, जिनमें कुल जमा राशि 3,12,414 करोड़ रुपये थी। यह दिखाता है कि केवल खाता खोलना ही नहीं, बल्कि औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में बचत का जुड़ना भी बढ़ा है।सरकारी योजनाओं और सब्सिडी से जुड़े ऋणों के लिए जन समर्थ पोर्टल एक डिजिटल मंच के रूप में काम करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के साथ अब चुनौती केवल पहुंच की नहीं, बल्कि वित्तीय साक्षरता, डिजिटल अवसंरचना और ऋण, बीमा जैसी सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने की भी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जन धन दर्शक ऐप का उपयोग भारत के गांवों में बैंकिंग आउटलेट की मैपिंग के लिए किया जाता है।
- बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट ऐसे अधिकृत मध्यस्थ होते हैं जो शाखा रहित क्षेत्रों में बुनियादी बैंकिंग सेवाएं देते हैं।
- इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की शुरुआत 2018 में डाक विभाग के तहत हुई थी।
- प्रधानमंत्री जन-धन योजना 2014 में वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के रूप में शुरू की गई थी।
कुल मिलाकर, आबाद गांवों तक बैंकिंग कवरेज का यह स्तर भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी प्रगति है। अब अगला फोकस इस पहुंच को अधिक उपयोगी, डिजिटल और सेवामुखी बनाने पर रहेगा।