भारत की प्रत्यक्ष कर वसूली में मजबूती, बायूएंसी लगातार तीसरे साल 1 से ऊपर
भारत में प्रत्यक्ष कर बायूएंसी 2024-25 में 1.39 रही, जिससे यह लगातार तीसरे वित्तीय वर्ष 1 से ऊपर बनी रही। यह संकेत देता है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह की वृद्धि नाममात्र जीडीपी की वृद्धि से तेज रही। कर-राजस्व और अर्थव्यवस्था की गति के बीच यह अनुपात सरकार की कर-प्रशासन क्षमता और कर आधार के विस्तार को समझने का अहम पैमाना माना जाता है।
प्रत्यक्ष कर बायूएंसी क्या बताती है
प्रत्यक्ष कर बायूएंसी एक वित्तीय अनुपात है, जो प्रत्यक्ष कर संग्रह में बदलाव की तुलना नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद में बदलाव से करता है। यदि यह अनुपात 1 से ऊपर हो, तो इसका अर्थ है कि कर राजस्व अर्थव्यवस्था की नाममात्र वृद्धि से तेज बढ़ रहा है। भारत में प्रत्यक्ष करों में आयकर, कॉरपोरेट कर, प्रतिभूति लेनदेन कर और आय या लाभ पर लगाए जाने वाले अन्य कर शामिल हैं। इन करों का प्रशासन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड करता है, जो राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है।
पिछले तीन वर्षों का रुझान
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रत्यक्ष कर बायूएंसी 2022-23 में 1.27, 2023-24 में 1.48 और 2024-25 में 1.39 रही। यानी तीनों वर्षों में यह 1 से ऊपर बनी रही, जो कर संग्रह में स्थिर मजबूती का संकेत है। 2023-24 में यह अनुपात सबसे ऊंचा रहा, जबकि 2024-25 में थोड़ी नरमी के बावजूद यह सकारात्मक दायरे में बना रहा।
यह प्रवृत्ति आम तौर पर बेहतर अनुपालन, कर आधार के विस्तार, और कर प्रशासन में सुधार से जुड़ी मानी जाती है। साथ ही, जब नाममात्र जीडीपी बढ़ती है, तो कर संग्रह का उससे तेज बढ़ना राजस्व स्थिति को मजबूत बनाता है।
नीतिगत बदलाव और संसदीय समीक्षा
वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में वेतनभोगी करदाताओं के लिए नई कर व्यवस्था के तहत मानक कटौती लाभ के साथ प्रभावी कर-मुक्त आय सीमा बढ़ाकर 12.75 लाख रुपये की गई। इसके बाद 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 लागू हुआ, जिसने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह ली।
इसी पृष्ठभूमि में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता भरतृहरि महताब कर रहे हैं, ने प्रत्यक्ष कर सुधारों और राजस्व प्रदर्शन की समीक्षा की। समिति ने करदाता अनुपालन, राजस्व संग्रह और कर बायूएंसी जैसे मुद्दों पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से जानकारी ली। समिति के लिए तैयार पृष्ठभूमि नोट में स्वैच्छिक अनुपालन और प्रत्यक्ष कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने से जुड़े सुधारों का भी उल्लेख किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रत्यक्ष कर बायूएंसी यह बताती है कि कर संग्रह की वृद्धि नाममात्र जीडीपी की वृद्धि की तुलना में कितनी तेज है।
- भारत में प्रत्यक्ष करों का प्रशासन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) करता है।
- प्रत्यक्ष करों के प्रमुख घटक आयकर और कॉरपोरेट कर हैं।
- आयकर अधिनियम, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 1961 की जगह ली।
लगातार तीसरे वर्ष 1 से ऊपर बनी प्रत्यक्ष कर बायूएंसी यह दिखाती है कि कर संग्रह की रफ्तार अर्थव्यवस्था की नाममात्र वृद्धि के अनुरूप ही नहीं, बल्कि उससे बेहतर भी रही है। आने वाले समय में कर सुधार, अनुपालन और प्रशासनिक दक्षता इस रुझान को बनाए रखने में निर्णायक रहेंगे।