भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 पहुंची
भारत की कुल प्रजनन दर यानी टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) वर्ष 2024 में घटकर 1.9 दर्ज की गई है। यह आंकड़ा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) द्वारा जारी किया गया। जनसंख्या अध्ययन में 2.1 बच्चों प्रति महिला को “रिप्लेसमेंट लेवल फर्टिलिटी” माना जाता है, जो यह दर्शाता है कि एक पीढ़ी अपनी अगली पीढ़ी को जनसंख्या स्तर पर बनाए रख सकती है। भारत का TFR अब इस स्तर से नीचे पहुंच गया है, जो देश में बदलते जनसांख्यिकीय रुझानों की ओर संकेत करता है।
टोटल फर्टिलिटी रेट क्या है
टोटल फर्टिलिटी रेट किसी महिला द्वारा अपने प्रजनन काल, सामान्यतः 15 से 49 वर्ष की आयु के दौरान, जन्म दिए जाने वाले औसत बच्चों की संख्या को दर्शाता है। 2.1 का रिप्लेसमेंट स्तर इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसमें जन्म के समय लिंगानुपात और शिशु मृत्यु दर को भी ध्यान में रखा जाता है। यदि किसी देश का TFR लंबे समय तक इस स्तर से नीचे रहता है, तो भविष्य में जनसंख्या वृद्धि धीमी या नकारात्मक हो सकती है।
राज्यों के अनुसार प्रजनन दर
वर्ष 2024 के आंकड़ों में Bihar ने सबसे अधिक 2.9 TFR दर्ज किया। इसके अलावा Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Rajasthan, Chhattisgarh और Jharkhand भी रिप्लेसमेंट स्तर से ऊपर रहे। वहीं Delhi ने सबसे कम 1.2 TFR दर्ज किया। Tamil Nadu, Kerala और West Bengal में यह दर 1.3 रही। ग्रामीण भारत में TFR 2.1 जबकि शहरी क्षेत्रों में 1.5 दर्ज किया गया।
भारत की जनसांख्यिकीय संरचना
भारत की कार्यशील आयु वाली आबादी, जिसे 15-59 वर्ष आयु वर्ग के रूप में परिभाषित किया जाता है, वर्ष 2024 में कुल जनसंख्या का 66.4% रही। यह भारत के “जनसांख्यिकीय लाभांश” को दर्शाता है। दूसरी ओर बुजुर्ग आबादी, यानी 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का अनुपात पिछले दशक में 8.6% से बढ़कर 9.7% हो गया। Kerala में बुजुर्ग आबादी का हिस्सा 15% के साथ सबसे अधिक दर्ज किया गया।
जनसंख्या वृद्धावस्था और चुनौतियां
TFR में गिरावट और बुजुर्ग आबादी में वृद्धि भविष्य में भारत के लिए नई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां ला सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन व्यवस्था और वृद्धजन देखभाल की मांग बढ़ने की संभावना है। वहीं कार्यशील आयु वर्ग की बड़ी आबादी आर्थिक विकास के लिए अवसर भी प्रदान करती है, यदि उसे पर्याप्त शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास उपलब्ध कराया जाए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रिप्लेसमेंट फर्टिलिटी स्तर 2.1 बच्चों प्रति महिला माना जाता है।
- सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम भारत के प्रमुख जनसांख्यिकीय डेटा स्रोतों में से एक है।
- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 वर्ष 2019-21 के दौरान आयोजित किया गया था।
- भारत की कार्यशील आयु आबादी 15-59 वर्ष आयु वर्ग को माना जाता है।
भारत में घटती प्रजनन दर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी देश की जनसंख्या संरचना में बड़े बदलाव का संकेत देती है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव आर्थिक नीतियों, सामाजिक योजनाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।