भारत का रक्षा उत्पादन FY 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

भारत का रक्षा उत्पादन FY 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

भारत ने रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपना वार्षिक रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया है। यह वृद्धि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश की बदलती रक्षा नीति और घरेलू विनिर्माण क्षमता को दर्शाती है।

भारत में रक्षा उत्पादन की स्थिति

रक्षा उत्पादन में हथियार, सैन्य प्लेटफॉर्म, मिसाइल प्रणालियां, गोला-बारूद, संचार उपकरण, युद्धक वाहन तथा अन्य सैन्य प्रणालियों का निर्माण शामिल होता है। भारत का रक्षा औद्योगिक आधार सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों पर आधारित है। इसमें—

  • रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSUs)
  • आयुध निर्माणी इकाइयाँ
  • निजी रक्षा निर्माता
  • लाइसेंस प्राप्त उत्पादन सुविधाएँ

महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पिछले वर्षों की तुलना में वृद्धि

रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

  • FY 2013-14 में रक्षा उत्पादन: ₹43,746 करोड़
  • FY 2020-21 में रक्षा उत्पादन: ₹84,643 करोड़
  • FY 2025-26 में रक्षा उत्पादन: ₹1.78 लाख करोड़

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लगभग एक दशक में भारत का रक्षा उत्पादन चार गुना से अधिक बढ़ा है।

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी

वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा उत्पादन का लगभग 76 प्रतिशत योगदान सार्वजनिक क्षेत्र से आया। रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और अन्य सरकारी इकाइयों ने उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाई। वहीं निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। FY 2025-26 में निजी क्षेत्र का योगदान लगभग ₹42,000 करोड़ रहा, जो कुल उत्पादन का करीब 24 प्रतिशत है। यह वृद्धि रक्षा क्षेत्र में निजी निवेश और उद्योगों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

रक्षा निर्यात में भी रिकॉर्ड वृद्धि

भारत ने FY 2025-26 में ₹38,424 करोड़ के रक्षा निर्यात दर्ज किए। रक्षा निर्यात में वृद्धि से भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। भारतीय रक्षा उत्पाद अब विभिन्न देशों को निर्यात किए जा रहे हैं, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग भी बढ़ रहा है।

रक्षा बजट 2026

केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसमें—

  • ₹2.19 लाख करोड़ सैन्य आधुनिकीकरण और पूंजीगत अधिग्रहण के लिए
  • शेष राशि वेतन, रखरखाव, संचालन और अन्य रक्षा आवश्यकताओं के लिए

आवंटित की गई है। यह आवंटन भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं को आधुनिक बनाने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया है।

आत्मनिर्भर भारत और रक्षा विनिर्माण

रक्षा उत्पादन में वृद्धि का सीधा संबंध आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) अभियान से है। इस पहल का उद्देश्य—

  • रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना,
  • स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना,
  • घरेलू उद्योगों को मजबूत करना,
  • और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाना

है। सरकार द्वारा सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, रक्षा औद्योगिक गलियारों और निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने जैसी नीतियों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत का रक्षा उत्पादन FY 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंचा।
  • FY 2020-21 में रक्षा उत्पादन ₹84,643 करोड़ था।
  • FY 2013-14 में रक्षा उत्पादन ₹43,746 करोड़ था।
  • सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान FY 2025-26 में लगभग 76% रहा।
  • निजी क्षेत्र का योगदान लगभग ₹42,000 करोड़ रहा।
  • भारत ने FY 2025-26 में ₹38,424 करोड़ के रक्षा निर्यात दर्ज किए।
  • केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ आवंटित किए गए।
  • आत्मनिर्भर भारत पहल का उद्देश्य रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना है।

भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचना देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और औद्योगिक क्षमता में तेजी से हो रही प्रगति का प्रमाण है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की संयुक्त भागीदारी, बढ़ते रक्षा निर्यात और सरकारी नीतिगत समर्थन के माध्यम से भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है।

Originally written on June 17, 2026 and last modified on June 17, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *