भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 विस्तार परियोजनाओं को दी मंजूरी, बढ़ेगी रेल सुरक्षा
भारतीय रेलवे ने 15 जून 2026 को स्वदेशी कवच 4.0 (Kavach 4.0) प्रणाली के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं में रेल मार्गों पर कवच की स्थापना, लोकोमोटिव में उपकरणों का एकीकरण तथा आधुनिक संचार अवसंरचना का विकास शामिल है। यह कदम रेलवे सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा दुर्घटनाओं की संभावना को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है कवच 4.0?
कवच भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है। इसका उद्देश्य ट्रेनों की निरंतर निगरानी कर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह प्रणाली निम्नलिखित जोखिमों को रोकने में सहायता करती है—
- सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD)
- आमने-सामने की टक्कर
- पीछे से होने वाली टक्कर
- अत्यधिक गति (Overspeeding)
कवच स्वचालित रूप से ट्रेन को नियंत्रित कर संभावित दुर्घटनाओं को रोकने की क्षमता रखता है।
अहमदाबाद मंडल में विस्तार
रेल मंत्रालय ने गुजरात स्थित पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल में 598 रूट किलोमीटर और 48 ब्लॉक सेक्शनों पर कवच संस्करण 4.0 लागू करने की मंजूरी दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 140 करोड़ रुपये है। इस मंजूरी के साथ अहमदाबाद मंडल के शेष रेल खंड भी कवच प्रणाली के दायरे में आ जाएंगे। इससे पहले इसी मंडल के लगभग 702 रूट किलोमीटर क्षेत्र में कवच परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी थी।
अंबाला मंडल में भी बड़ी परियोजना
भारतीय रेलवे ने उत्तरी रेलवे के अंबाला मंडल में भी कवच 4.0 लागू करने की स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना 811 रूट किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगी और इसकी लागत लगभग 201 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। यह नेटवर्क हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न रेल खंडों तक विस्तारित होगा।
आधुनिक संचार नेटवर्क का विकास
कवच विस्तार कार्यक्रम भारतीय रेलवे के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके अंतर्गत शेष रेल मार्गों पर LTE आधारित संचार नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। 15 जून 2026 को रेलवे ने संचार अवसंरचना और कवच विस्तार से जुड़ी 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय संचार व्यवस्था स्थापित करना है, जो आधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक मानी जाती है।
दक्षिण भारत में भी विस्तार
नई मंजूरियों के अंतर्गत तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के उच्च यातायात वाले रेल मार्गों पर भी कवच 4.0 लागू किया जाएगा। लगभग 548 किलोमीटर लंबे इन रेल मार्गों पर कवच प्रणाली की स्थापना के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत स्वीकृत की गई है।
लोकोमोटिव में कवच की स्थापना
इससे पहले 7 अप्रैल 2026 को भारतीय रेलवे ने कवच प्रणाली के तेजी से विस्तार के लिए 1,364 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी थी। उस योजना के अंतर्गत 232 लोकोमोटिवों में कवच संस्करण 4.0 स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। लोकोमोटिव स्तर पर यह प्रणाली चालक को वास्तविक समय में चेतावनी देती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक भी लगा सकती है।
रेलवे सुरक्षा में महत्व
ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणालियां विश्वभर में रेलवे सुरक्षा बढ़ाने के लिए उपयोग की जाती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को कम करना और ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित बनाना होता है। कवच 4.0 भारतीय परिस्थितियों और रेलवे नेटवर्क की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई स्वदेशी तकनीक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कवच भारतीय रेलवे की स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है।
- कवच 4.0 इसका नवीनतम संस्करण है।
- अहमदाबाद मंडल में 598 रूट किलोमीटर पर कवच विस्तार को मंजूरी मिली।
- अंबाला मंडल में 811 रूट किलोमीटर पर कवच लागू किया जाएगा।
- SPAD का अर्थ है Signal Passing at Danger।
- 15 जून 2026 को कवच और संचार अवसंरचना से जुड़ी 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत हुईं।
- अप्रैल 2026 में 232 लोकोमोटिवों में कवच 4.0 लगाने की मंजूरी दी गई थी।
- पश्चिम रेलवे और उत्तरी रेलवे भारतीय रेलवे के 18 रेलवे जोनों में शामिल हैं।
कवच 4.0 का विस्तार भारतीय रेलवे की सुरक्षा प्रणाली को नई मजबूती प्रदान करेगा। स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह प्रणाली दुर्घटनाओं की रोकथाम, मानव त्रुटियों में कमी और सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में भारतीय रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक मानी जा रही है।