भारत-कतर आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार
भारत और कतर ने निवेश, व्यापार और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में सहयोग को तेज करने पर सहमति जताई है। 30 सितंबर 2026 को दोहा में एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक की वार्षिक बैठक के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश संधि और मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने का फैसला किया। चर्चा में समुद्री संपर्क, भुगतान प्रणाली और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दे भी शामिल रहे।
निवेश समझौते पर नई पहल
द्विपक्षीय निवेश संधि यानी BIT का उद्देश्य दो देशों के बीच होने वाले निवेश को सुरक्षा और स्पष्ट नियम देना होता है। भारत इस समय अपने मॉडल BIT ढांचे की समीक्षा कर रहा है और संशोधित मसौदा 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विचाराधीन है। इसी पृष्ठभूमि में भारत और कतर ने नए निवेश ढांचे पर चर्चा की, खासकर तब जब कतर ने भारत में 10 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
चर्चा में कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी के भारत में कार्यालय खोलने की संभावना भी सामने आई। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि निवेश प्रवाह को संस्थागत रूप देने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
एफटीए से व्यापार विस्तार की उम्मीद
मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA व्यापार बाधाओं को कम या समाप्त करने के लिए किया जाता है। भारत और कतर इस समझौते पर बातचीत को तेज कर रहे हैं और इसे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की संभावना से जोड़ा जा रहा है। 29 सितंबर 2026 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 14.15 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एफटीए प्रक्रिया को व्यापक आर्थिक जुड़ाव के साथ गति दी जा रही है। यह कदम ऊर्जा, रसायन, खाद्य उत्पाद, सेवाओं और निवेश जैसे क्षेत्रों में नए अवसर खोल सकता है।
भुगतान और समुद्री संपर्क पर भी चर्चा
बैठक में भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI को कतर में विस्तार देने पर भी बात हुई। UPI भारत की रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया संचालित करता है। विदेशों में इसके विस्तार से प्रवासी भारतीयों और सीमा-पार भुगतान को सुविधा मिल सकती है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सामान्य व्यापार प्रवाह और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए निर्बाध समुद्री आवाजाही की जरूरत पर जोर दिया। यह जलमार्ग खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- BIT यानी द्विपक्षीय निवेश संधि, दो देशों के बीच निवेश की सुरक्षा और नियम तय करती है।
- FTA यानी मुक्त व्यापार समझौता, व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए किया जाता है।
- UPI भारत की रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसे NPCI संचालित करता है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल-परिवहन मार्गों में से एक है।
भारत और कतर के बीच यह बातचीत दिखाती है कि दोनों देश ऊर्जा सहयोग से आगे बढ़कर निवेश, व्यापार, भुगतान और समुद्री संपर्क को एक व्यापक आर्थिक साझेदारी में बदलना चाहते हैं।