बिम्सटेक की आतंकवाद-रोधी बैठक से क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को नई गति
नई दिल्ली में 28-29 सितंबर 2026 को बिम्सटेक की संयुक्त कार्य समूह बैठक (आतंकवाद-रोधी और अंतरराष्ट्रीय अपराध) का 11वां सत्र आयोजित हुआ। भारत सरकार की मेजबानी में हुई इस बैठक में बिम्सटेक के सभी सात सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
बिम्सटेक ढांचे में सुरक्षा सहयोग का महत्व
बिम्सटेक यानी बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच है। इसका गठन 1997 में हुआ था और यह दक्षिण एशिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को जोड़ता है। आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ अब सुरक्षा सहयोग भी इसकी प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल है।
आतंकवाद, संगठित अपराध, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की अवैध तस्करी और धन शोधन जैसे मुद्दे इस क्षेत्र के लिए साझा चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में बिम्सटेक के भीतर समन्वय बढ़ाना सदस्य देशों के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई
इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में आतंकवाद-रोधी मामलों के अतिरिक्त सचिव डॉ. सुहेल अजाज खान ने की। चर्चा के दौरान बिम्सटेक क्षेत्र में मौजूद पारंपरिक और उभरते गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिनिधियों ने आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए।
बैठक का दायरा केवल आतंकवाद तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें मानव तस्करी, अवैध ड्रग तस्करी, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग, कानूनी और कानून-प्रवर्तन से जुड़े विषय भी शामिल रहे। इससे स्पष्ट है कि बिम्सटेक अब सुरक्षा को बहुआयामी दृष्टि से देख रहा है, जहां अपराध-रोधी तंत्र और खुफिया समन्वय दोनों की भूमिका बढ़ रही है।
भारत की भूमिका और हालिया सुरक्षा पहल
नई दिल्ली में इस बैठक का आयोजन भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा कूटनीति को भी रेखांकित करता है। भारत लंबे समय से बिम्सटेक को एक ऐसे मंच के रूप में आगे बढ़ाता रहा है, जो उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सहयोग को मजबूत कर सके।
इससे पहले 16 जुलाई 2026 को भी नई दिल्ली में बिम्सटेक के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की 5वीं बैठक हुई थी, जिसमें आतंकवाद और संगठित अपराध पर चर्चा की गई थी। लगातार हो रही ऐसी बैठकों से यह संकेत मिलता है कि सदस्य देश सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बिम्सटेक की स्थापना 1997 में हुई थी।
- इसके सात सदस्य देश हैं: बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड।
- बिम्सटेक का पूरा नाम बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन है।
- बिम्सटेक के सुरक्षा एजेंडे में आतंकवाद-रोधी सहयोग, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और धन शोधन जैसे विषय शामिल हैं।
नई दिल्ली में हुई यह बैठक दिखाती है कि बिम्सटेक अब केवल आर्थिक मंच नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भी एक महत्वपूर्ण सहयोगी ढांचा बनता जा रहा है।