भारत और यूएई के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण समझौता
भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने 15 मई 2026 को रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और भारत को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की आपूर्ति बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अबू धाबी यात्रा के दौरान हुआ, जहां उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता के दौरान ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-यूएई ऊर्जा सहयोग
संयुक्त अरब अमीरात भारत को एलपीजी की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश है और भारत की लगभग 40 प्रतिशत एलपीजी आवश्यकता पूरी करता है। इसके अलावा यूएई पिछले वर्ष भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत था, जिसका हिस्सा भारत के कुल कच्चे तेल आयात में लगभग 11 प्रतिशत रहा। भारत और यूएई इससे पहले भी 2018 में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण के क्षेत्र में साझेदारी कर चुके हैं। उस समय इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच कर्नाटक के मंगलुरु स्थित भंडारण केंद्र में 50 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल संग्रहित करने का समझौता हुआ था।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का महत्व
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार ऐसे आपातकालीन कच्चे तेल भंडार होते हैं जिन्हें वैश्विक आपूर्ति संकट या युद्ध जैसी परिस्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए सुरक्षित रखा जाता है। भारत में इन भंडारों का प्रबंधन इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। यह नया समझौता वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और फारस की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री जोखिमों के बीच ईंधन आपूर्ति स्थिर रखने के उद्देश्य से किया गया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण समझौते
भारत और यूएई के बीच इस यात्रा के दौरान रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक फ्रेमवर्क समझौता भी हुआ। इसके अलावा गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने के लिए भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यूएई ने भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा भी की। इससे पहले जनवरी 2026 में दोनों देशों के बीच 3 अरब अमेरिकी डॉलर का एलएनजी खरीद समझौता हुआ था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एलपीजी का उपयोग मुख्य रूप से खाना पकाने, हीटिंग और औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार किसी देश की ऊर्जा सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
- होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है।
- इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड भारत के रणनीतिक तेल भंडारण केंद्रों का प्रबंधन करती है।
भारत और यूएई के बीच यह नया ऊर्जा समझौता दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकालिक स्थिरता मिलने के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी।