भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी: व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग को नई गति

भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी: व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग को नई गति

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है। दोनों देशों के संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और आर्थिक विकास जैसे अनेक क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुके हैं। वर्ष 2025 और 2026 के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण बैठकों, समझौतों और संवादों के माध्यम से अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया है। इन पहलों का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

वार्षिक नेताओं का शिखर सम्मेलन और आर्थिक सहयोग

जुलाई 2026 में मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूती प्रदान की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम तथा आर्थिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में स्वच्छ ऊर्जा, आधारभूत संरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, निवेश प्रवाह तथा भविष्य की आर्थिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। जून 2026 में नई दिल्ली में आयोजित दूसरे रक्षा मंत्रियों के संवाद में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकियों पर विस्तार से चर्चा की। इससे पहले अक्टूबर 2025 में पहला रक्षा मंत्रिस्तरीय संवाद आयोजित किया गया था। दोनों देशों का साझा उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना तथा रक्षा सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाना है।

व्यापार समझौते और बाजार तक पहुंच

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते के तहत 1 जनवरी 2026 से भारत के सभी निर्यातों को ऑस्ट्रेलिया में शून्य-शुल्क पहुंच का लाभ मिलने लगा। यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है। इसके अलावा व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर कई दौर की वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच बढ़ाना और आर्थिक एकीकरण को मजबूत करना है। सितंबर 2025 में जैविक उत्पादों की पारस्परिक मान्यता व्यवस्था पर हस्ताक्षर भी किए गए, जिससे दोनों देशों की प्रमाणन प्रणालियों को मान्यता मिली।

प्रौद्योगिकी और नवाचार में बढ़ता सहयोग

भारत और ऑस्ट्रेलिया भविष्य की तकनीकों में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। नवंबर 2025 में शुरू की गई प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी का मुख्य फोकस कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य निवेश, नवाचार और उद्योगों के बीच सहयोग को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की स्थापना वर्ष 2020 में हुई थी।
  • भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता दिसंबर 2022 से लागू है।
  • ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ आर्थिक जुड़ाव को बढ़ाने के लिए नया आर्थिक रोडमैप फरवरी 2025 में जारी किया।
  • वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 33.93 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के साझा हितों और दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, निवेश और नवाचार के क्षेत्रों में मजबूत होती साझेदारी न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि को भी नई मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले वर्षों में यह संबंध वैश्विक आर्थिक और सामरिक परिदृश्य में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना रखता है।

Originally written on July 9, 2026 and last modified on July 9, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *