भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापार बढ़ाने की नई रूपरेखा
भारत और उज़्बेकिस्तान ने अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर लगभग 3 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। नई दिल्ली में 3 अगस्त 2026 को हुए भारत-उज़्बेकिस्तान बिजनेस फोरम में इस लक्ष्य पर चर्चा हुई, साथ ही मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाओं और कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
व्यापार संबंधों में तेज़ी और नया लक्ष्य
दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले वर्ष 30% बढ़ा और पहली बार 1.3 अरब डॉलर के पार पहुंचा। 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 1.32 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 1.15 अरब डॉलर और उज़्बेकिस्तान का निर्यात 164 मिलियन डॉलर से अधिक रहा। यह वृद्धि दिखाती है कि मध्य एशिया के इस देश के साथ भारत के आर्थिक संबंध अब केवल औपचारिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यावसायिक साझेदारी का ठोस आधार बन रहे हैं।उज़्बेकिस्तान एक भू-आबद्ध मध्य एशियाई गणराज्य है और स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल का सदस्य है। भारत और उज़्बेकिस्तान ने सोवियत संघ के विघटन के बाद 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे।
संस्थागत संवाद और व्यापारिक बाधाओं पर फोकस
दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में संस्थागत तंत्र की अहम भूमिका रही है। 19 जून 2026 को भारत-उज़्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग का 14वां सत्र हुआ, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और उज़्बेकिस्तान के उप मंत्री शोक़रुख गुलामोव ने की। इस बैठक में व्यापार विस्तार, गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा हुई।भारत-उज़्बेकिस्तान बिजनेस फोरम को दोनों देशों के व्यवसायों के बीच सीधे संपर्क, निवेश चर्चाओं और क्षेत्रीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। मुक्त व्यापार समझौता ऐसे व्यापारिक करार होते हैं, जिनसे शुल्क घटते या समाप्त होते हैं और बाजार पहुंच तथा नियामकीय अड़चनों को भी कम किया जा सकता है।
कौन-से क्षेत्र बन सकते हैं सहयोग के नए केंद्र
दोनों पक्षों ने खनन, रेयर अर्थ खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल अवसंरचना, कृषि और कपास उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की पहचान की है। लगभग 400 भारतीय कंपनियां पहले से उज़्बेकिस्तान में काम कर रही हैं, जबकि दोनों देशों की संयुक्त परियोजनाओं की पाइपलाइन 5 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है।रेयर अर्थ खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, मैग्नेट, इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में उपयोग होते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में सहयोग रणनीतिक महत्व रखता है। ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों का सहयोग मध्य एशिया में भारत की उपस्थिति को मजबूत करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उज़्बेकिस्तान दुनिया के दो doubly landlocked देशों में से एक है; दूसरा देश लिकटेंस्टीन है।
- उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद है, जो क्षेत्रीय कूटनीति और व्यापारिक बैठकों का प्रमुख केंद्र है।
- भारत-उज़्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग का प्रमुख संस्थागत तंत्र है।
- भारत और उज़्बेकिस्तान शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य हैं।
कुल मिलाकर, व्यापार लक्ष्य, संस्थागत संवाद और प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान यह संकेत देती है कि भारत-उज़्बेकिस्तान संबंध अब केवल पारंपरिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।