भारत-इंडोनेशिया के बीच कई अहम समझौते, रक्षा, अंतरिक्ष और समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती
भारत और इंडोनेशिया ने 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों में रक्षा, चुनाव प्रबंधन, समुद्री सहयोग, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटल भुगतान और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों को शामिल किया गया। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
रक्षा सहयोग को मिला नया आयाम
रक्षा क्षेत्र में इंडोनेशिया ने भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस के साथ अनुबंध किया। इसके साथ ही इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी निर्णय लिया। यह कदम भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा।
चुनाव प्रबंधन और डिजिटल मतदान में सहयोग
भारत के निर्वाचन आयोग और इंडोनेशिया के जनरल इलेक्शंस कमीशन के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत भारत, इंडोनेशिया की आवश्यकताओं के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) विकसित करने में सहयोग करेगा। यह पहल चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
समुद्री संपर्क और रणनीतिक साझेदारी
दोनों देशों ने मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास पर सहमति व्यक्त की। यह बंदरगाह भारत की ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से लगभग 100 मील की दूरी पर स्थित है और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री संपर्क तथा रणनीतिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस सहयोग से क्षेत्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन को भी गति मिलने की संभावना है।
महत्वपूर्ण खनिज और औद्योगिक निवेश
भारत ने इंडोनेशिया में इस्पात, निकल और दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों (रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट) के निर्माण क्षेत्र में निवेश करने की योजना बनाई है। निकल बैटरियों, स्टेनलेस स्टील और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में एक प्रमुख कच्चा माल है। यह सहयोग दोनों देशों के औद्योगिक विकास और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में सहायक होगा।
अंतरिक्ष, डिजिटल भुगतान और सांस्कृतिक संरक्षण
इंडोनेशिया की राष्ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच अंतरिक्ष सहयोग पर समझौता हुआ। इसके अलावा भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और इंडोनेशिया के क्यूआरआईएस डिजिटल भुगतान सिस्टम को जोड़ने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। दोनों देशों ने इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रंबानन मंदिर के संरक्षण और सांस्कृतिक सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली है, जिसे भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है।
- मलक्का जलडमरूमध्य विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और यह हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है।
- यूपीआई भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जबकि क्यूआरआईएस इंडोनेशिया का राष्ट्रीय क्यूआर आधारित भुगतान मानक है।
- प्रंबानन मंदिर मध्य जावा में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर परिसर है, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए ये व्यापक समझौते दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करेंगे। वर्ष 2018 में संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद यह पहली महत्वपूर्ण द्विपक्षीय यात्रा थी, जिसने रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार, संस्कृति और क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त किया है।