भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में सेक्शन 301 बना प्रमुख मुद्दा
भारत और अमेरिका के बीच 2 जून 2026 से नई दिल्ली में व्यापार वार्ता का नया दौर शुरू हुआ है। इस वार्ता में अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 301 से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। भारत चाहता है कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते में ऐसे प्रावधान शामिल किए जाएं, जो भविष्य में सेक्शन 301 जांचों के आधार पर लगाए जाने वाले अमेरिकी शुल्कों (टैरिफ) से भारतीय निर्यातकों को सुरक्षा प्रदान कर सकें। दोनों देशों के बीच यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
क्या है सेक्शन 301?
सेक्शन 301, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार अधिनियम 1974 (Trade Act of 1974) का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसके तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को यह अधिकार प्राप्त है कि वह अन्य देशों की व्यापार नीतियों और प्रथाओं की जांच करे तथा यदि उन्हें अनुचित या भेदभावपूर्ण माना जाए तो उनके खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई कर सके। इन कार्रवाइयों में अतिरिक्त आयात शुल्क, व्यापार प्रतिबंध या अन्य आर्थिक उपाय शामिल हो सकते हैं। इसी कारण सेक्शन 301 को अमेरिकी व्यापार नीति का एक प्रभावशाली उपकरण माना जाता है।
भारत समेत 16 देशों पर जांच
मार्च 2026 में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने भारत सहित 16 व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ नई सेक्शन 301 जांच शुरू की थी। इन जांचों में विनिर्माण क्षेत्रों में अत्यधिक उत्पादन क्षमता (Structural Excess Capacity) तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में कथित जबरन श्रम (Forced Labour) जैसे मुद्दों की समीक्षा की जा रही है। भारत का मानना है कि ऐसी जांचों के आधार पर भविष्य में लगाए जाने वाले टैरिफ उसके निर्यात हितों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए वह व्यापार समझौते में सुरक्षा उपायों की मांग कर रहा है।
द्विपक्षीय व्यापार समझौते की प्रगति
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1 जून 2026 को बताया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण की लगभग 99 प्रतिशत चर्चा पूरी हो चुकी है। नई दिल्ली में आयोजित वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे हैं। यह बैठक तीन से चार दिनों तक चलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार समझौते की व्यापक रूपरेखा तैयार होने के बाद जुलाई 2026 में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर भारत की यात्रा कर सकते हैं।
टैरिफ और प्रतिस्पर्धा का मुद्दा
अमेरिका में सेक्शन 301 के तहत नई शुल्क व्यवस्था 24 जुलाई 2026 से लागू होने वाली है। यह समयसीमा फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद तय हुई है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था। भारत इस वार्ता में विशेष रियायती शुल्क दरों की मांग कर रहा है। साथ ही वह अमेरिका द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत सामान्य शुल्क से राहत चाहता है। भारत यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि उसकी टैरिफ संरचना बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कमजोर न पड़े।
व्यापार समझौते का महत्व
द्विपक्षीय व्यापार समझौता दो देशों के बीच व्यापार को सरल और अधिक लाभकारी बनाने का माध्यम होता है। इसमें टैरिफ, बाजार पहुंच, सीमा शुल्क नियम और निवेश से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है तथा निवेश, विनिर्माण और निर्यात के अवसरों को बढ़ावा दे सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेक्शन 301, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार अधिनियम 1974 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।
- अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) सेक्शन 301 जांचों का संचालन करता है।
- भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की लगभग 99 प्रतिशत चर्चा 1 जून 2026 तक पूरी हो चुकी थी।
- फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व पारस्परिक टैरिफ को अवैध करार दिया था।
भारत और अमेरिका के बीच चल रही यह व्यापार वार्ता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि समझौता सफलतापूर्वक अंतिम रूप लेता है, तो यह व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकता है। साथ ही भारत को भविष्य में संभावित व्यापारिक प्रतिबंधों और अतिरिक्त टैरिफ से भी बेहतर सुरक्षा मिल सकती है।