भारतीय नौसेना को मिला नया स्वदेशी एंटी-सबमरीन युद्धपोत

भारतीय नौसेना को मिला नया स्वदेशी एंटी-सबमरीन युद्धपोत

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने 29 जुलाई 2026 को कोच्चि में भारतीय नौसेना के लिए सातवें एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट, आईएनएस मछलीपट्टनम (बीवाई 529), को लॉन्च किया। यह जहाज माही-क्लास ASW SWC परियोजना का हिस्सा है, जिसे तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी-रोधी अभियानों, कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशनों, माइन-लेइंग और सबसर्फेस सर्विलांस के लिए तैयार किया गया है।

तटीय सुरक्षा के लिए खास डिजाइन

एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ऐसे नौसैनिक प्लेटफॉर्म होते हैं जो उथले समुद्री क्षेत्रों में काम करने के लिए बनाए जाते हैं। बड़े युद्धपोतों की तुलना में इनकी गतिशीलता बेहतर होती है, इसलिए ये तट के पास पनडुब्बियों की पहचान, निगरानी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई में अधिक उपयोगी साबित होते हैं। आईएनएस मछलीपट्टनम की लंबाई 78.0 मीटर, चौड़ाई 11.36 मीटर और ड्राफ्ट लगभग 2.7 मीटर है। इसका विस्थापन करीब 900 टन है और यह 25 नॉट्स की अधिकतम गति तक जा सकता है।

स्वदेशी तकनीक और नौसेना की क्षमता

इस जहाज में स्वदेशी रूप से विकसित हुल माउंटेड सोनार और लो फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो पानी के भीतर गतिविधियों की पहचान और निगरानी में मदद करते हैं। ऐसे सेंसर तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी-रोधी युद्ध और समुद्री खुफिया क्षमता को मजबूत करते हैं। माही-क्लास परियोजना में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

माही-क्लास परियोजना की प्रगति

यह आठ जहाजों वाली परियोजना कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और भारतीय नौसेना के बीच अनुबंध के तहत चल रही है। इस श्रृंखला का पहला जहाज माही 23 अक्टूबर 2025 को सौंपा गया था, जबकि दूसरा जहाज आईएनएस मालवन 31 मार्च 2026 को डिलीवर किया गया। अब सातवें जहाज के लॉन्च के साथ यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ती दिख रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईएनएस मछलीपट्टनम माही-क्लास ASW SWC श्रृंखला का सातवां जहाज है।
  • इसका लॉन्च 29 जुलाई 2026 को कोच्चि, केरल में हुआ।
  • मछलीपट्टनम आंध्र प्रदेश का एक ऐतिहासिक बंदरगाह शहर है।
  • लो फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार का उपयोग नौसैनिक अभियानों में पानी के भीतर लक्ष्य पहचान के लिए किया जाता है।

भारतीय नौसेना के लिए ऐसे स्वदेशी युद्धपोत समुद्री सीमाओं की निगरानी और तटीय सुरक्षा को नई मजबूती देते हैं। मछलीपट्टनम जैसे नामों का चयन भी भारत की समुद्री विरासत और नौसैनिक परंपरा से जुड़ाव को दर्शाता है।

Originally written on July 30, 2026 and last modified on July 30, 2026.

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