भारतीय नौसेना के लिए मरीन गैस टरबाइन जनरेटर खरीदेगी रक्षा मंत्रालय
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने 19 जून 2026 को भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण रक्षा खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह अनुबंध भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। समझौते के तहत भारतीय नौसेना के लिए 1.25 मेगावाट क्षमता वाले 12 मरीन गैस टरबाइन जनरेटर सेट खरीदे जाएंगे। नई दिल्ली में हुए इस समझौते पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। यह कदम आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
मरीन गैस टरबाइन जनरेटर क्या होते हैं?
मरीन गैस टरबाइन जनरेटर जहाजों और युद्धपोतों पर उपयोग होने वाली विद्युत उत्पादन प्रणालियां हैं। इनका मुख्य कार्य ईंधन की ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में तथा फिर उसे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करना होता है। यह विद्युत शक्ति जहाज के विभिन्न उपकरणों, संचार प्रणालियों, हथियार प्रणालियों और अन्य आवश्यक मशीनों के संचालन में उपयोग की जाती है। आधुनिक युद्धपोतों में उन्नत ऊर्जा प्रणालियों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है, इसलिए अधिक क्षमता वाले जनरेटर नौसेना की परिचालन दक्षता को बेहतर बनाते हैं।
‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी का महत्व
यह अनुबंध रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) 2020 की ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के अंतर्गत किया गया है। इस श्रेणी में खरीदे जाने वाले उपकरणों में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का होना अनिवार्य है। इस व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय रक्षा उद्योग को प्रोत्साहित करना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा देश में उन्नत रक्षा तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना है। यह नीति आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया कार्यक्रमों के लक्ष्यों के अनुरूप है।
भारतीय नौसेना को कैसे मिलेगा लाभ?
1.25 मेगावाट क्षमता वाले ये जनरेटर भारतीय नौसेना के कोलकाता श्रेणी के युद्धपोतों में लगाए जाएंगे। वर्तमान में इन जहाजों पर कम क्षमता वाले जनरेटर कार्यरत हैं, जिन्हें अब अधिक आधुनिक और शक्तिशाली प्रणालियों से प्रतिस्थापित किया जाएगा। इस परियोजना का कार्यान्वयन अगले पांच वर्षों में पूरा किया जाएगा। नई प्रणाली के उपयोग से जहाजों की ऊर्जा दक्षता, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।
स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा
भारत फोर्ज लिमिटेड इस परियोजना के तहत एक समर्पित एकीकरण और परीक्षण सुविधा स्थापित करेगी। इसके अलावा कंपनी भविष्य में बड़े ऊर्जा संयंत्रों और गैस टरबाइन आधारित प्रणोदन प्रणालियों के डिजाइन एवं विकास कार्यक्रमों में भी भागीदारी करेगी। इस प्रकार की परियोजनाएं देश में रणनीतिक तकनीकों के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में सहायक होती हैं। साथ ही यह भारतीय उद्योग को उच्च तकनीकी रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कोलकाता श्रेणी के युद्धपोत भारतीय नौसेना के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक (Guided Missile Destroyers) हैं।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 भारत में रक्षा खरीद के विभिन्न वर्गों और नियमों को निर्धारित करती है।
- आत्मनिर्भर भारत अभियान का उद्देश्य रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है।
- मेक इन इंडिया कार्यक्रम का शुभारंभ भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के उद्देश्य से किया गया था।
भारतीय नौसेना के लिए मरीन गैस टरबाइन जनरेटर की यह खरीद देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ स्वदेशी रक्षा उद्योग को नई गति प्रदान करेगी। यह परियोजना आधुनिक नौसैनिक तकनीक, घरेलू विनिर्माण और रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के बढ़ते कदमों का प्रतीक है।